बाइक में किया बस इतना बदलाव और एवरेज हो गया 153 किलोमीटर 0

Bike technology

कर ले जुगाड़ कर ले…कर ले कोई जुगाड़। भाईसाहब, ये गाना तो बहुत बाद में आया है। लेकिन भारतीय इस विधा में सदियों से माहिर हैं। अगर यह भी कहा जाए कि जुगाड़ नाम की विधा भारत में ही पैदा की गई है तो भी गलत नहीं होगा। यहां इसके बूते लोग कुछ भी कर सकते हैं।

अब देखिए ना, उत्तरप्रदेश के एक युवक ने ऐसी जुगाड़ की है जिसके बूते बाइक एक लीटर पेट्रोल में 153 किलोमीटर का एवरेज देने लगी। बताओ मतलब…। आपकी बाइक कितना एवरेज देती है। केवल 70 का। भाई इस हिसाब से तो यह एवरेज डबल हो गया।

अब आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा कि इतना एवरेज भी हो सकता है भला। नहीं ना। मगर यह सच है। ऐसी ही एक जुगाड़ को एक तकनीक के तौर बदला गया है। और तो और इसे उत्तर प्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के साथ ही एक राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट ने प्रमाणित भी किया है।

यह जुगाड़ इतना सस्ता है कि महज चंद रुपए में एक छोटा सा बदलाव करके 153 किलोमीटर प्रतिलीटर का एवरेज पाया जा सकता है। मगर कैसे। इस बात का पता आपको यह स्टोरी पढ़ने के बाद लग जाएगा। तो फिर देर किस बात की है। आइए जानते हैं पूरा मामला।

कौन हैं ये शख्स

ये हैं उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के गुदड़ी गांव के रहने वाले विवेक कुमार पटेल। बाइक इंजन को लेकर सालों से मेहनत कर रहे थे। अब जाकर मेहनत सफल हुई।

क्या किया

बाइक के इंजन में मामूली फेरबदल किया। इसके बाद बाइक का एवरेज बढ़कर 153 किलोमीटर प्रति लीटर हो गया। विवेक किसी भी बाइक के इंजन में अपनी तकनीक का उपयोग कर उसका एवरेज 30 से 35 किलोमीटर बढ़ा देते हैं।

दो संस्थाओं ने किया प्रमाणित

नवभारत टाइम्स के अनुसार विवेक का जुगाड़ सिर्फ जुगाड़ नहीं है, बल्कि वह तकनीक के रूप में बदल गया है। कारण कि इसे उत्तरप्रदेश काउंसिल अॉफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी और इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टिट्यूट अॉफ टेक्नोलॉजी ने इसे प्रमाणित कर दिया है।

आइडिया को मिल गया अप्रूवल

रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तरप्रदेश काउंसिल ने विवेक के इनोवेशन को तकनीकी रूप से प्रमाणित करने के लिए मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से इसकी टेस्टिंग कराई। हैरानी की बात यह है कि जांच में तकनीक सही पाई गई।

क्या है तकनीक

इस तकनीक में बस कार्बोरेटर को बदलना होता है। विवेक, बाइक में लगा कार्बोरेटर निकालकर अपना कार्बोरेटर लगा देता है। इसके बाद बाइक का एवरेज बढ़ जाता है। बताया जा रहा है कि इसमें पांच सौ रुपए का खर्च आता है। मीडिया रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि इस तकनीक में कॉर्बोरेटर को सेट कर दिया जाता है।

पेटेंट के लिए आवेदन

यूपीसीएसटी ने इस आइडिया को पेटेंट रजिस्ट्रेशन के लिए भी अप्लाय कराया है। पेटेंट होने के बाद इसका कमर्शियल उपयोग किया जा सकता है। तभी यह तकनीक सबके लिए उपलब्ध हो सकेगी।

आगे क्या हो सकता है

इस तकनीक के एक बार पेटेंट हो जाने के बाद बाइक्स मैन्युफेक्चरिंग कम्पनियां इसे खरीद भी सकती है। इसका उपयोग कर ज्यादा माइलेज वाली बाइक बेचकर अपनी सेल्स और मुनाफा बढ़ा सकती है। वहीं दूसरी ओर अगर भविष्य में इस तकनीक की बाइक्स आती हैं तो पेट्रोल की खपत में कमी आएगी। 2015 के एक आंकड़े के अनुसार देश में 15 करोड़ से ज्यादा बाइक्स हैं। अब दो बाइक्स के बराबर एवरेज एक बाइक देगी तो पेट्रोल कम्पनियों का हाल आप समझ सकते हैं।

स्टार्टअप प्रोजेक्ट बना

कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के टेक्नॉलजी बिजनस इंक्यूबेशन सेंटर ने विवेक की इस तकनीक को स्टार्टअप के तौर पर रजिस्टर किया है। इसके लिए सेंटर की ओर से स्टार्टअप प्रॉजेक्ट के लिए 75 लाख रुपये की मदद भी स्वीकृत की गई है।

नहीं पड़ता पिकअप में अंतर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपीसीएसटी के जॉइंट डायरेक्टर इनोवेशन ने बताया कि इस तकनीक से पेट्रोल की खपत कम हो जाती है। साथ ही स्पीड और पिकअप में भी कोई परिवर्तन नहीं आया।

क्या कहते हैं विवेक

विवेक ने मीडिया को बताया कि मैं इस तरकीब को बाइक, जनरेटर समेत अन्य वाहनों का एवरेज बढ़ाने में प्रयोग करने लगा। इसके अनुसार काम करने में मुझे करीब 2 साल लग गए। तो कैसी लगी आपको यह स्टोरी। अपने दोस्तों को भी बताइएगा।

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