उस एक पेड़ की वजह से गाव का किसान बना रातोरात करोड़पति… 0

पेड़ भगवान है ऐसा बुजुर्ग कहते है.वही बात आज सच साबित हुई है.ऐसेही बुजुर्गोंने लगाया एक पेड़ भगवान के रूप में सामने आया है.आत्महत्या और आकाल की वजह से विदर्भ का किसान परेशान है.पर पंजाबराव शिंदे हर्षी जिल्हा पुसद यवतमाल का किसान कैसे एक पेड़ की वजह से रातोरात करोड़पति बना ये जानेंगे खास रे पर…

लालूप्रसाद यादव के कार्यकाल 2007 में वर्धा-नांदेड़ रेल्वे मार्ग को मंजूरी मिली.अब 10 साल के बड़े इंतजार के बाद रेल्वे मार्ग के लिए भूसंपादन का काम शुरू है.भूसंपादन के काम के दौरान अधिकारियों का ध्यान एक पेड़ ने आकर्षित कर लिया.ये पेड़ रक्तचंदन का है ऐसा बताया गया.ये रेल्वे मार्ग पंजाबराव शिंदे के खेत से जानेवाला है और ये पेड़ उनके खेत मैं है उसी वजह से पंजाबराव शिंदे करोड़पति बननेवाले है.ये पेड़ आम पेड़ नही है बल्कि रक्तचंदन का पेड़ है.उनके परिवार को भी मालूम नही था कि आपने खेत मे जो बुजुर्गोंने लगाया हुआ पेड़ है वो रक्तचंदन का है.इस पेड़ की अन्तराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये कीमत है.ये पेड़ रक्तचंदन का है या नही ये सत्यपित करने के लिए ज़िला स्तरीय समिति के तरफ से इस पेड़ के अलग अलग नमूने लेकर प्रयोगशाला में भेज दिए गए.

वैसे तो रक्तचंदन का पेड़ महाराष्ट्र में नहीं पाया जाता.ये पेड़ आंध्रप्रदेश में पाया जाता है.इसी लिए उस बात की पुष्टि करने के लिए इस पेड़ का रिपोर्ट आंध्रप्रदेश भेजा गया.इस पेड़ का वजन लगभग आधा टन है.बाजार में रक्तचंदन बड़ी कीमत में बेचा जाता है.शायद ही दिखने वाले इस पेड़ को देखने के लिए आस पास के गांववालों ने काफी भीड़ लगी हुई है.

अंतरास्ट्रीय बाजार में रक्तचंदन को बड़ी माँग है और बहुत कीमती भी दी जाती है.ये पेड़ कोई काँट ना ले इसकेलिए पंजाबराव शिंदे ने एक सुरक्षा योजना भी बनाई है.और इस पेड़ से उनको आर्थिक लाभ भी मिलेगा ऐसा उन्होंने बताया है. मिंग वंश और उसके बाद के शासकों के बीच लाल चंदन की लकड़ी के प्रति दीवानगी का पता इस बात से चलता है कि वहां ‘रेड सैंडलवुड म्यूज़ियम’ नाम का एक विशेष संग्रहालय है जहां लाल चंदन से बने अनगिनत फर्नीचर और सजावटी सामान संजोकर रखे गए हैं.

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