कोई बेचता है पतंग, किसी का कबाड़ का कारोबार, ये है PM मोदी का परिवार

आज जब राजनीति में हर तरफ परिवारवाद को बोलबाला हो, सियासी परिवारों में कलह की खबरें लगातार सुर्ख‍ियों में हों, ऐसे में गुजरात में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर एक नजर डालना जरूरी है. राजनीति के मौजूदा दौर में आपको मोदी परिवार की कहानी काफी दिलचस्प लगेगी.

आपको यह जानकर अचरज होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के भाई-भतीजे और परिवार के दूसरे सदस्य उनकी ऊंची अहमियत से दूर लगभग अनजान-सी जिंदगी जी रहे हैं. इस परिवार में कोई फिटर पद से रिटायर हुआ है , कोई पेट्रोल पंप पर सहायक है, कोई पतंग बेच कर गुजारा करता है, तो कोई कबाड़ का बिजनेस भी करता है. परिवार के ज्यादातर सदस्यों ने कभी हवाई जहाज के अंदर कदम तक नहीं रखा है….

अक्टूबर में पुणे में एक एनजीओ के कार्यक्रम में 75 वर्षीय सोमभाई मोदी मंच पर मौजूद थे. तभी संचालक ने खुलासा कर दिया कि वे प्रधानमंत्री के सबसे बड़े भाई हैं. श्रोताओं में एकाएक हल्की-सी उत्तेजना फैल गई. आखिर अपने पैतृक शहर वड़गर में वृद्धाश्रम चलाने वाले सोमभाई सफाई देने आगे आए. उन्होंने कहा, ‘मेरे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक परदा है. मैं उसे देख सकता हूं पर आप नहीं देख सकते. मैं नरेंद्र मोदी का भाई हूं, प्रधानमंत्री का नहीं. प्रधानमंत्री मोदी के लिए तो मैं 123 करोड़ देशवासियों में से ही एक हूं, जो सभी उनके भाई-बहन हैं.’

यह कोई बड़बोलापन नहीं है. सोमभाई प्रधानमंत्री मोदी से पिछले ढाई साल से नहीं मिले हैं, जब से उन्होंने देश की गद्दी संभाली है. भाइयों के बीच सिर्फ फोन पर ही बात हुई है. उनसे छोटे पंकज इस मामले में थोड़ा किस्मत वाले हैं.

गुजरात सूचना विभाग में अफसर पंकज की भेंट अपने मशहूर भाई से इसलिए हो जाती है कि उनकी मां हीराबेन उन्हीं के साथ गांधीनगर के तीन कमरे के सामान्य-से घर में रहती हैं. प्रधानमंत्री अपनी मां से मिलने पिछले दो महीने

पहले प्रधानमंत्रियों के साथ रहता था पूरा कुनबा : देश के प्रधानमंत्री अमूमन परिवार वाले रहे हैं. नेहरू के साथ बेटी इंदिरा रहती थीं. उनके उत्तराधिकारी लालबहादुर शास्त्री 1, मोतीलाल नेहरू मार्ग पर अपने पूरे कुनबे के साथ रहते थे. उनके साथ बेटा-बेटी, पोता-पोती सभी रहते थे. इंदिरा गांधी के बेटे राजीव और संजय तथा उनका परिवार साथ रहते थे. यहां तक कि अविवाहित प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी एक परिवार था. वे 1998 में जब 7, रेसकोर्स रोड में रहने पहुंचे तो उनकी दत्तक पुत्री नम्रता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य का परिवार भी साथ रहने आया.

परिवार से उदासीन मोदी : चाय की दुकान के मालिक दामोदरदास मूलचंद मोदी और उनकी गृहिणी पत्नी हीराबेन के छह बच्चों में से तीसरे नंबर के प्रधानमंत्री मोदी परिवार से निपट उदासीन हैं. यह लोगों को उनके निःस्वार्थ जीवन के बारे में बताने में उपयोगी है. हाल में नोटबंदी के बमुश्किल हफ्ते भर बाद 14 नवंबर को मोदी ने गोवा की एक सभा में कुछ भावुक होकर कहा, ”मैं इतनी ऊंची कुर्सी पर बैठने के लिए पैदा नहीं हुआ. मेरा जो कुछ था, मेरा परिवार, मेरा घर…मैं सब कुछ देशसेवा के लिए छोड़ आया.” यह कहते समय उनका गला भर्रा गया था.

मोदी परिवार की गुमनाम जिंदगी : मोदी अपने परिवार को कितना पीछे छोड़ आए, यह गुजरात का एक चक्कर लगा लेने से ही जाहिर हो जाता है. मोदी कुनबा आज भी उसी तरह गुमनाम मध्यवर्गीय जिंदगी जी रहा है जैसी वह 2001 में नरेंद्र भार्ई के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के समय जीता था. प्रधानमंत्री के एक और बड़े भाई 72 वर्षीय अमृतभाई एक प्राइवेट कंपनी में फिटर के पद से रिटायर हुए हैं. 2005 में उनकी तनख्वाह महज 10,000 रु. थी.

वे अब अहमदाबाद के घाटलोदिया इलाके में चार कमरे के मध्यवर्गीय आवास में रिटायरमेंट के बाद वाला जीवन जी रहे हैं. उनके साथ बेटा, 47 वर्षीय संजय, उसकी पत्नी और दो बच्चे रहते हैं. संजय छोटा-मोटा कारोबार चलाते हैं. संजय के बेटे नीरव और बेटी निराली दोनों इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं. आइटीआइ पास कर चुके संजय अपनी लेथ मशीन पर छोटे-मोटे कल-पुर्जे बनाते हैं और ठीक-ठाक जीवन जी रहे हैं, लेकिन मध्यवर्गीय दायरे में ही. 2009 में खरीदी गई कार घर के बाहर ढकी खड़ी रहती है. उसका इस्तेमाल खास मौकों पर ही होता है क्योंकि पूरा परिवार ज्यादातर दो-पहिया वाहनों पर ही चलता है.

कभी हवाई जहाज के अंदर नहीं गए : संजय का परिवार बतलाता है कि उन लोगों को अभी किसी यात्री विमान को अंदर से देखने का मौका नहीं मिला है. वे लोग मोदी से सिर्फ दो बार मिले हैं. एक बार 2003 में बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने गांधीनगर के अपने घर में पूरे परिवार को बुलाया था और दूसरी बार 16 मई, 2014 को जब बीजेपी ने लोकसभा में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी (फिर उसी गांधीनगर के घर में). सत्ताधर रिहाइशी सोसाइटी में हर कोई जानता है कि अमृतभाई प्रधानमंत्री के भाई हैं. लेकिन स्थानीय किंवदंतियों पर यकीन करें तो संजय का जिस बैंक में खाता है, उसके अधिकारी इस तथ्य से परिचित नहीं हैं. उनके बेटे प्रियांक को हाल में पैसा निकालने के लिए लंबी लाइन में खड़े देखा गया.

संभाल के रखा है मोदी का आयरन प्रेस और सिन्नी पंखा : संजय के पास सबसे कीमती थाती वह स्मृति चिह्न है जिससे उनके चाचा के करीने से इस्तरी किए कपड़े पहनने की आदत का पता चलता है. मोदी शायद इस आयरन का इस्तेमाल अमृतभाई के साथ अहमदाबाद में 1969 से 1971 के बीच रहने के दौरान किया करते थे. संजय बताते हैं कि उन्होंने अपने मां-बाप को 1984 में इसे कबाड़ में बेचने से मना कर दिया था (लगता है, उन्हें अपने चाचा की महानता का पहले ही एहसास हो गया था). अगर काका (मोदी) आज इस आयरन को देखें तो उन्हें ऐसा ही लगेगा जैसे टाइटेनिक का अवशेष मिला हो…जैसा डूबे जहाज से मिले व्यक्तिगत सामान को देख लोगों को लगा था. यह घर भी उनके चाचा को भविष्य में म्युजियम की तरह लगेगा. सिन्नी ब्रांड का वह पंखा आज भी है जिसे मोदी गर्मी में इस्तेमाल किया करते थे.

कभी फायदा उठाने की कोशिश नहीं की : आरएसएस का नियम है कि प्रचारक को परिवार के सदस्यों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, सो, मोदी ने 1971 में परिवार से दूरी बनानी शुरू की. वे संघ के काम पर ज्यादा ध्यान देने लगे और ब्रह्मचारी का जीवन जीने लगे. वर्षों से यही कार्यक्रम रहा. हालांकि मोदी राजनैतिक सीढिय़ां चढ़ते गए. फिर भी, उनके रिश्तेदार उन्हें गर्व से याद करते हैं.

ऐसा ही गर्व का भाव प्रधानमंत्री के मन में रहता है और वे इससे राहत महसूस करते हैं कि वे रिश्तेदारों की किसी तरह की तरफदारी की मांग से बचे हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं, ”सचमुच मेरे भाइयों और भतीजों को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए कि वे साधारण जीवन जी रहे हैं और कभी मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं करते. आज की दुनिया में यह वाकई दुर्लभ है.’

संघर्षों और क‍ठिनाइयों भरा जीवन : हालांकि परिवार के कुछ सदस्य मोदी के सबसे छोटे भाई प्रह्लाद मोदी से दूरी बनाए रखते हैं. वे सस्ते गल्ले की एक दुकान चलाते हैं और गुजरात राज्य सस्ता गल्ला दुकान मालिक संगठन के अध्यक्ष हैं. वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के मामले में मुख्यमंत्री मोदी की पहल से नाराज रहते हैं और दुकान मालिकों परछापा डालने के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं.

मोदी के बाकी कुनबे, उनके भाई, भतीजे, भतीजी या दूसरे रिश्तेदारों का जीवन संघर्षों और कठिनाइयों का ही है. दरअसल कुछ तो जिंदगी बेहद गरीबी में काट रहे हैं. मोदी के चचेरे भाई अशोकभाई (मोदी के दिवंगत चाचा नरसिंहदास के बेटे) तो वड़नगर के घीकांटा बाजार में एक ठेले पर पतंगें, पटाखे और कुछ खाने-पीने की छोटी-मोटी चीजें बेचते हैं. अब उन्होंने 1,500 रु. महीने में 8-4 फुट की छोटी-सी दुकान किराए पर ले ली है.

इस दुकान से उन्हें करीब 4,000 रु. मिल जाते हैं. पत्नी वीणा के साथ एक स्थानीय जैन व्यापारी के साप्ताहिक गरीबों को भोजन कराने के आयोजन में काम करके वे 3,000 रु. और जुटा लेते हैं. इसमें अशोकभाई खिचड़ी और कढ़ी बनाते हैं ओर उनकी पत्नी बरतन मांजती हैं. ये लोग शहर में एक तीन कमरे के जर्जर-से मकान में रहते हैं.

मामूली कमाई पर गुजारा : उनके बड़े भाई 55 वर्षीय भरतभाई भी ऐसी ही कठिन जिंदगी जीते हैं. वे वड़नगर से 80 किमी दूर पालनपुर के पास लालवाड़ा गांव में एक पेट्रोल पंप पर 6,000 रु. महीने में अटेंडेंट का काम करते हैं और हर 10 दिन में घर आते हैं. वड़नगर में उनकी पत्नी रमीलाबेन पुराने भोजक शेरी इलाके में अपने छोटे-से घर में ही किराना का सामान बेचकर 3,000 रु. महीने की कमाई कर लेती हैं. तीसरे भाई 48 वर्षीय चंद्रकांतभाई अहमदाबाद के एक पशु गृह में हेल्पर का काम करते हैं.

मामूली कमाई पर गुजारा : उनके बड़े भाई 55 वर्षीय भरतभाई भी ऐसी ही कठिन जिंदगी जीते हैं. वे वड़नगर से 80 किमी दूर पालनपुर के पास लालवाड़ा गांव में एक पेट्रोल पंप पर 6,000 रु. महीने में अटेंडेंट का काम करते हैं और हर 10 दिन में घर आते हैं. वड़नगर में उनकी पत्नी रमीलाबेन पुराने भोजक शेरी इलाके में अपने छोटे-से घर में ही किराना का सामान बेचकर 3,000 रु. महीने की कमाई कर लेती हैं. तीसरे भाई 48 वर्षीय चंद्रकांतभाई अहमदाबाद के एक पशु गृह में हेल्पर का काम करते हैं.

अशोकभाई और भरतभाई के चौथे भाई 61 वर्षीय अरविंदभाई कबाड़ी का काम करते हैं. वे वड़नगर और आसपास के गांवों में फेरी लगाकर पुराने तेल के टिन, और ऐसा कबाड़ खरीदते हैं और उसे ऑटोरिक्शा या राज्य ट्रांसपोर्ट की बस में ले आते हैं. इससे उन्हें 6,000-7,000 रु. महीने की कमाई हो जाती है, जो उनके और पत्नी रजनीबेन के लिए काफी है. उनका कोई बच्चा नहीं है. नरसिंहदास के बच्चों में भरतभाई और रमीलाबेन ही सबसे ज्यादा कमाई करते हैं. उनकी कमाई कई बार महीने में 10,000 रु. तक कमाई हो जाती है.नरसिंहदास के सबसे बड़े बेटे 67 वर्षीय भोगीभाई भी वड़नगर में किराने की एक दुकान से छोटी-मोटी कमाई कर लेते हैं. संयोग से नरसिंहदास के पांच बेटों में से कोई भी मैट्रिक से ऊपर नहीं पढ़ पाया.

अपने भाई दामोदरदास की ही तरह नरसिंहदास भी वड़नगर रेलवे स्टेशन के पास चाय की दुकान चलाया करते थे. दामोदरदास चार भाई थे. नरसिंहदास के अलावा नरोत्तमदास ओर जगजीवनदास. इन दोनों का इंतकाल हो चुका है. कांतिलाल और जयंतीलाल, दोनों रिटायर शिक्षक हैं. मोदी के चाचा जयंतीलाल के दामाद अब रिटायर हो चुके हैं और गांधीनगर में बस गए हैं. वे वड़नगर के पास विसनगर में बस कंडक्टर हुआ करते थे. प्रधानमंत्री की ही जाति के, वड़नगर में आरएसएस के कार्यकर्ता भरतभाई मोदी कहते हैं, ‘वड़नगर या अहमदाबाद में किसी ने नरेंद्रभाई के रिश्तेदारों को उन पर दबाव बनाते नहीं देखा. यह आज के जमाने में दुर्लभ है.’

कैंटीन में सोते थे नरेंद्र मोदी : अमृतभाई के पास नरेंद्र मोदी के आगे बढ़ने के अनेक किस्से हैं. 1969 में वे अहमदाबाद में गीता मंदिर के पास गुजरात राज्य परिवहन के मुख्यालय में एक कैंटीन चलाया करते थे. तभी मोदी उनके साथ रहने आए. अमृत भाई याद करते है, ‘कैंटीन के पास मेरा एक कमरे का मकान बहुत छोटा था, इसलिए नरेंद्रभाई कैंटीन में ही सोया करते थे. वे दिन भर का काम पूरा करते और शाम को बुजर्ग प्रचारकों की सेवा करने आरएसएस के मुख्यालय पहुंच जाया करते थे. वे देर रात लौटते और घर से आया टिफिन का खाना खाते और कैंटीन की मेज पर अपना बिस्तर लगा लेते.’

अमृतभाई वह बात याद करके भावुक हो जाते हैं जब नरेंद्रभाई फरवरी 1971 में उनसे यह कहकर जाने लगे कि वे आध्यात्मिक साधना के लिए पहाड़ों में जा रहे हैं और घर हमेशा के लिए छोड़ रहे हैं. ‘जब उसने मुझे बताया कि वह परिवार हमेशा के लिए छोड़ रहा है तो मेरी आंखों में आंसू आ गए, मगर वह शांत और संयत था.’

हनी सिंह क्यों नहीं गाते है अब गाने, वजह कर देगी आपको हैरान

आप सभी मशहूर सिंगर यो यो हनी सिंह को तो जानते ही होंगे |जी हाँ हनी सिंह को भारत का सबसे फेमस सिंगिंग कलाकारों में गिना जाता हैं |आप की जानकारी के लिए बता दे की इस पॉपस्टार के ट्विटर पर 4 मिलियन फॉलोवर्स है और फेसबुक पर 30 मिलियन से ज्यादा फॉलोवर्स हैं|

रैप के इस बादशाह को भारत के अलावा विदेशो में भी काफी जाना जाता हैं और तो और कहा जाता हैं की भारत के पहले ऐसे Rap स्टार हैं जिन्होंने रैप को भारत में काफी फेमस किया हैं क्यूंकि भारत में चाहे कही भी किसी भी पार्टी हो या शादी हर जगह होनी सिंह के गाने तो बजाए ही जाते हैं इनके गाने के बिना हर पार्टी और शादी अधूरी हैं |

बॉलीवुड के इस रैप किंग को पिछले काफी लम्बे समय से नहीं देखा गया हैं और तो और पिछले दो साल से इन्होने एक भी गाना नहीं गया है और ना ही कोई एल्बम बनाया हैं |पिछले कुछ सालो से हनी सिंह बड़े परदे से गायब हैं |

खबरों की माने तो बताया जा रहा हैं की हनी सिंह इन दिनों बाइपोलर डिसऑर्डर नामक बीमारी से पीड़ित है और इस बिमारी के बारे में डॉक्टर ने बताया की ऐसे में पीड़ित हर चीज से दूर रहना चाहता हैं |बताया जा रहा हैं की हनी को 2 या 5 लोगो से बात करने में भी बहुत दिक्क्त होती हैं |

किसी समय में करोड़ों लोगों के बीच बैखोफ होकर गाने वाले हनी सिंह आज चार- पांच लोगों से बात करने में भी डरते है ! हनी सिंह पहले से अब बहुत बेहतर हालत मे है ! डॉक्टरों का कहना है की वह जल्द ही ठीक हो जायेंगे और अपने फैंस के सामने फिर से वही धमाकेदार और जावा दिलो को खुश करने वाला गाना लेकर आएंगे |

खबरों के मुताबिक़ बताया जा रहा हैं की हनी सिंह बीमार होने के दौरान काफी गाने लिखे हैं और वे ठीक होते ही अपने गानो के साथ धमाकेदार एंट्री करने वाले हैं |

इंसानी चेहरे वाली बिल्ली की फोटोज वायरल, जानिए सच्चाई

इंसानी चेहरे वाली बिल्ली की फोटोज वायरल, जानिए सच्चाई

सोशल मीडिया पर इंसानी चेहरे वाली एक बिल्ली की फोटोज वायरल हो रही हैं।

दावा किया जा रहा है कि यह बिल्ली मलेशिया में पैदा हुई है इसके अनोखे रूप और आकार की वजह से इसकी जांच के लिए एक लैब में रखा गया है।

वहीं स्थानीय पुलिस ने ऐसे किसी भी दावे को झूठ बताया है। ऐसी किसी भी बिल्ली के पैदा होने की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन फोटोज के बाद एक बार फिर इंसान की तरह पैदा होने वाले जानवरों की चर्चा शुरू हो गई है।

फोटोज में बिल्ली की तरह दिख रहे इस जीव का सिर इंसान की तरह नजर आ रहा है। वहीं बाल भी और स्किन भी इंसान की तरह ही है। वहीं पुलिस के मुताबिक ये फोटोज ऑनलाइन बेचे जा रहे silicon baby werewolf के हो सकते हैं।

जिन्हें पहले इंटरनेट से ही डाउनलोड किया गया और फिर वायरल किया जा रहा है।

इन 15 रोचक तथ्यों से साबित होता है कि “कपिल शर्मा” रातों रात स्टार नहीं बने

जिंदगी में हंसना बहुत ज़रूरी है, और जो लोग दूसरों को हंसाते हैं उनका कद हमेशा से ही औरों से ऊंचा रहा हैं. ऐसा ही एक नाम है कपिल शर्मा. कपिल शर्मा आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पंजाब के छोटे से शहर की मिडिल क्लास फ़ैमली का ये लड़का पूरे देश को हंसाते-हंसाते इस मुकाम पर पहुंच जाएगा, खुद उसने भी नहीं सोचा था. ऐसा नहीं है इनको ये शौहरत और नाम ऐसे ही मिल गया. इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और कुछ कर गुज़रने का जज़्बा था. Kapil Sharma की जिंदगी के कुछ ऐसे पहलु हम आपके सामने लाएं हैं, जिनके बारे में आपने कभी सुना नहीं होगा.

1. 2004 में कपिल शर्मा के पिता का निधन हो गया था. वो पंजाब पुलिस में हेड कांस्टेबल थे. उनके जाने के बाद कपिल शर्मा के ऊपर घर की सारी जिम्मेदारियां आ गईं. साथ ही उनकी एक बहन थी जिनकी उन्हें शादी भी करनी थी.

2. कपिल शर्मा कभी भी एक काॅमेडियन, एंकर और एक्टर नही बनना चाहते थे. हमेशा से उनका एक पैशन था सिंगर बनना.

3. कपिल मुंबई आने से पहले पीसीओ और कपड़े की मिल में काम कर चुके थे. उन्होंने अपने शहर में साॅफ्टड्रिंक्स बेचने का काम भी किया। ये सब काम उन्होंने पैसे कमाने के लिए किए थे.

4. पहले कपिल को ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ के ऑडिशन में रिजेक्ट कर दिया था। बाद में उन्हें कॉल करके बुलाया गया और उन्होंने इस शो को जीतकर खुद को साबित किया.

5. लोगों ने पहली बार उन्हें’..लाफ्टर चैलेंज’से जानना शुरू किया, लेकिन उससे पहले उन्होंने सालों तक थिएटर में काम किया और कितने सालों तक संघर्ष किया ये किसी को नहीं मालूम। लोग समझते हैं कि वो रातों-रात स्टार बन गए, यह बात सच नहीं है.

6. थिएटर के लिए उनका प्यार काफ़ी पहले से था. उन्होनें अपनी एक्टिंग और कॉमेडी को अपना करियर बनाने की ठान ली. कपिल शर्मा ने अमृतसर में थिएटर ज़्वाईन किया और बाद में दिल्ली आ गए, जहां उन्होंने कुछ शोज़ भी किए.

7. कपिल शर्मा का कहना है कि कॉमेडी एक दुर्घटना जैसी थी. लेकिन हमारे लिए तो ये दुर्घटना एक अच्छी ख़बर बन गई.

8. कपिल शर्मा को सबसे बड़ा ब्रेक मिला ‘The Great Indian Laughter Challenge’ शो में. 2007 में उन्होंने इस शो को जीता और उन्हें 10 लाख रुपये ईनामी राशी भी मिली.

9. कपिल जब बहन की शादी के लिए पैसे जुटा रहे थे, तभी वे संयोग से ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ जीत गए. इससे मिली 10 लाख रु. की इनामी राशि से उन्होंने धूमधाम से बहन की शादी की.

10. Comedy Circus के बाद कपिल शर्मा को अपना खुद का शो मिल गया. Comedy Nights With Kapil छोटे पर्दे का सबसे बड़ा हिट कॉमेडी शो है. इस शो में बड़े-बड़े स्टार्स अपनी फ़िल्मों को प्रमोट करने आते हैं.

11. Comedy Nights With Kapil की अपार सफ़लता के बाद कपिल शर्मा को बॉलीवुड से ऑफ़र आने लगे. उन्होंने इसे भी एक चुनौती की तरह लिया और ‘किस किस को प्यार करूं’ कॉमेडी मसाला फ़िल्म से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की.

12. कपिल एक बहुत Emotional Person हैं, उन्होने खुद कहा हैं वो बहुत जल्दी Weak हो जाते हैं.

13. कपिल शर्मा का पहला प्यार था सुष्मिता सेन. और आॅल टाॅइम फेवरेट एक्टर है धर्मेंद्र.

14. जिस चीज ने Kapil Sharma को इतना बड़ा बना दिया, वो था “Comedy Nights With Kapil”. लेकिन शायद आपको पता हो यह शो अब बंद हो चुका है. और इसकी जगह “The Kapil Sharma Show” शुरू हो चुका हैं.

15. मैं एक दिन Youtube पर Comedy Nights With Kapil के पुराने विडियो सर्च कर रहा था लेकिन पता चला की Colours ने सारे विडियो ही हटा लिए हैं. ऐसा क्यों किया गया ये मुझे भी नही पता.

Death Penalty in India, फांसी के बारे में जानकारी..

फांसी देना और लेना कोई आसान काम नही हैं. किसी को फांसी देते समय कुछ नियम का पालन करना पड़ता हैं इसमें फांसी का फंदा, फांसी देने का समय, फांसी की प्रकिया आदि शामिल हैं. आपने आज तक सिर्फ फिल्मों में ही फाँसी देते देखा होगा लेकिन आज हम आपको Death Penalty (फाँसी) से जुड़ी कुछ ऐसी बातें और सवालों के जवाब बताएंगे जो आपको आसानी से नही मिलेगे.

Q.1 फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं ?

Ans. हमारे कानून में फाँसी की सजा सबसे बड़ी सजा हैं. फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब इसलिए तोड़ दी जाती है क्योकिं इस पेन से किसी का जीवन खत्म हुआ है तो इसका कभी दोबारा प्रयोग ना हो. एक कारण ये भी है कि एक बार फैसला लिख दिये जाने और निब तोड़ दिये जाने के बाद खुद जज को भी यह यह अधिकार नहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सके या उस फैसले को बदल सके या पुनर्विचार की कोशिश कर सके.

Q.2 फांसी देते वक्त कौन-कौन मौजूद रहते हैं ?

Ans. फाँसी देते समय कुछ ही लोग मौजूद रहते हैं इनमें फांसी देते वक्त वहां पर जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, जल्लाद और डाॅक्टर मौजूद रहते हैं. इनके बिना फांसी नही दी जा सकती.

Q.3 फांसी देने से पहले जल्लाद क्या बोलता हैं ?

Ans. जल्लाद फांसी देने से पहले बोलता है कि मुझे माफ कर दो. हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लिम को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो है हुकुम के गुलाम.

Q.4 आखिर सुबह के समय सूर्योदय से पहले ही फांसी क्यो दी जाती हैं ?

Ans. फाँसी देना जेल अधिकारियों के लिए बहुत बड़ा काम होता हैं और इसे सुबह होने से पहले इसलिए निपटा दिया जाता है ताकि दूसरे कैदी और काम प्रभावित ना हो. एक नैतिक कारण ये भी हैं कि जिसको फांसी की सजा सुनाई गई हो उसे पूरा इंतजार कराना भी उचित नही हैं सुबह फांसी देने से उनके घर वालो को भी अंतिम संस्कार के लिए पूरा समय मिल जाता हैं.

Q.5 फांसी से पहले आखिरी इच्छा में जेल प्रशासन क्या क्या दे सकता हैं ?

Ans. आखिरी इच्छा पूछे बगैर किसी को फांसी नही दी जा सकती. कैदी की किसी आखिरी इच्छा में परिजनों से मिलना, कोई खास डिश खाना या कोई धर्म ग्रंथ पढ़ना शामिल होता हैं.

Q.6 कितनी देर के लिए फांसी पर लटकाया जाता हैं ?

Ans. फांसी से पहले मुजरिम के चेहरे को काले सूती कपड़े से ढक दिया जाता हैं और 10 मिनट के लिए फांसी पर लटका दिया जाता हैं फिर डाॅक्टर फांसी के फंदे में ही चेकअप करके बताता हैं कि वह मृत है या नहीं उसी के बाद मृत शरीर को फांसी के फंदे से उतारा जाता हैं.

फांसी से जुड़े 6 रोचक तथ्य

1. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक जिसे मौत की सजा दी जाती है उसके रिश्तेदारों को कम से कम 15 दिन पहले खबर मिल जानी चाहिए ताकि वो आकर मिल सकें.

2. फांसी की सजा पाए कैदियों के लिए फंदा जेल में ही सजा काट रहा कैदी तैयार करता है आपको अचरज हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने से ऐसी ही व्यवस्था चली आ रही हैं.

3. देश के किसी भी कोने में फांसी देने की अगर नौबत आती है तो फंदा सिर्फ बिहार की बक्सर जेल में ही तैयार होता है इसकी वजह यह है कि वहां के कैदी इसे तैयार करने में माहिर माने जाते हैं.

4. फांसी के फंदे की मोटाई को लेकर भी मापदंड तय है. फंदे की रस्सी डेढ़ इंच से ज्यादा मोटी रखने के निर्देश हैं. इसकी लंबाई भी तय हैं.

5. फाँसी के फंदे की कीमत बेहद कम हैं. दस साल पहले जब धनंजय को फांसी दी गई थी, तब यह 182 रुपए में जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था.

6. भारत में फांसी देने के लिए बस 2 ही जल्लाद हैं. ये जल्लाद जिन राज्यों में रहते हैं वहाँ की सरकार इन्हें 3,000 रूपए महीने के देती हैं और किसी को फांसी देने पर अलग से पैसे दिए जाते हैं. आतंकवादी संगठनो के सदस्यों को फांसी देने पर उनको मोटी फीस दी जाती हैं जैसे इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी देने पर जल्लाद को 25,000 रूपए दिए गए थे.

7. हमारे देश में दुर्लभतम मामलों में मौत की सजा दी जाती है. अदालत को अपने फैसले में ये लिखना पड़ता है कि मामले को दुर्लभतम (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर) क्यों माना गया ?

बालविवाह और फिर तलाक के दंश से निकलकर 25 साल में ही डीएसपी बनने वालीं अनीता प्रभा

एक होनहार विद्यार्थी का क्या लक्ष्य होता है? यही न कि वो खूब सारा पढ़-लिखकर प्रतिष्ठित पद पर पहुंचे। अपनी शिक्षा से अपने परिवार और देश का नाम रोशन करे। अनीता प्रभा के भी ऐसे ही तमाम सपने थे। अनीता प्रभा एक कुशाग्र बच्ची थी, जो स्कूल में हमेशा अव्वल नंबरों से पास होती थी। 10वीं में उसने 92 प्रतिशत अंक हासिल किए। लेकिन तब वह परंपराओं की बेड़ी नहीं तोड़ पाई और 17 साल की उम्र में अपने से 10 बरस बड़े लड़के से उसकी शादी कर दी गई, जैसा कि उसकी बड़ी बहन के साथ हुआ था। लेकिन बाद में उसने अपनी सुनी और सिर्फ अपनी। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोटमा की निवासी अनीता इस समय चर्चा में है। उन्होंने 25 साल में ही डीएसपी बनकर मिसाल कायम कर दी है।

अनीता के माता-पिता दोनों ही अध्यापक थे। घर में पढ़ाई का माहौल था पर माता-पिता जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे। हम जब बालविवाह या फिर लड़के-लड़कियों में असामनता की बात करते हैं तो दिमाग में एक अशिक्षित, दकियानूस परिवार का खाका कौंध उठता है। लेकिन यकीन नहीं होता कि अनीता के माता-पिता न सिर्फ शिक्षित थे बल्कि अध्यापक भी थे। उनके अंदर भी लड़के-लड़कियों में भेदभाव वाली सोच किस तरह घर करके बैठी थी कि उन्होंने अपनी इतनी होनहार बच्ची की शादी कानून के खिलाफ जाकर कर दी। मतलब उन्हें इतनी जल्दी थी कि अनीता के 18 साल पूरा होने का भी इंतजार नहीं किया। 17 साल में ही गैरकानूनी तरीके से 10 साल बड़े लड़के से शादी कर दी। सोचिए 10 साल बड़ा लड़का। एक मेधावी छात्रा, जिसमें अपार संभावनाएं थीं आगे बढ़ने की, कुछ बड़ा कर दिखाने की, उसके जीवन को किस तरह मिट्टी में मिलाया जा रहा था।

लगाओ कितनी भी बंदिशें, ये दरिया रोके न रुकेगा-

अनीता का ससुराल भी आर्थिक रूप से कमजोर था। सो, मेधावी अनीता को ग्रेजुएशन करने की अनुमति दे दी। ग्रेजुएशन के तीसरे साल के दौरान पति एक दुर्घटना में घायल हो गया। उसके दोनों हाथ टूट गए। अब पति की सेवा के चक्कर में वह परीक्षा में नहीं दे पाई। ऐसे में ग्रेजुएशन चार साल में पूरी की। इसका परिणाम यह हुआ कि बैंक के प्रोबेशनरी आफिसर की पोस्ट के लिए वह रिजेक्ट हो गई। लेकिन अनीता ने हार नहीं मानी। परिवार को चार पैसे मिले इसलिए उसने ब्यूटीशियन का कोर्स कर एक पार्लर में काम करना शुरू किया।

ये सब पढ़ने-सुनने में बड़ा आसान सा लगता है। लेकिन ये ही असल चुनौतियां हैं। कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, ये बात सत्य है। लेकिन किताबों से प्रेम करने वाली और बड़े-बड़े प्रशासनिक पदों पर पहुंचने का सपना देखने वाली अनीता के लिए एक ब्यूटीशियन की नौकरी करना किसी वंचना से कम नहीं होता होगा। लेकिन वो सारी प्रतिकूल परिस्थितियों को गले से लगाती गईं।

इन सबके बीच उनकी बड़ी समस्या थी उनका पति। अनीता को उसके साथ सामंजस्य बिठाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।बिना काम, तनावपूर्ण जिन्दगी और बिना परिवार के भी अनीता हताश नहीं हुई बल्कि हिम्मती बनी। उसने अपना रास्ता अब चुन लिया था। आत्मनिर्भरता के लिए उसने 2013 के विवादित व्यापमं की फारेस्ट गार्ड की परीक्षा दी। उसने 14 किमी की पैदल चाल परीक्षा 4 घंटे में पूरी की। दिसंबर 2013 में बालाघाट जिले मे उसे पोस्टिंग मिल गई। ऊंचे ख्वाब वाली अनीता ने व्यापमं की सब-इस्पेक्टर की परीक्षा में फिर शामिल हुई। लेकिन इस बार वह फिजिकल टेस्ट में फेल हो गई। दूसरी बार फिर प्रयास किया और अपनी कमजोरी को मजबूत करते हुए फिजिकल टेस्ट पास कर सब-इंस्पेक्टर पद हासिल कर लिया।

अनीता जैसी जिद और जिजीविषा एक मिसाल है-

बताते चलें कि इससे दो महीने पहले ही ओवरी में ट्यूमर के कारण अनीता ने सर्जरी करवाई थी। लेकिन कुछ कर दिखाने की जिद उनकी बीमारी के आगे बेहद फीकी थी। अनीता ने बतौर सूबेदार जिला रिजर्व पुलिस लाइन में जॉइन किया। उन्हें ट्रेनिंग के लिए सागर भेजा गया। इस दौरान पति के साथ डिवोर्स का केस कोर्ट पहुंच गया। अनीता ने मध्य प्रदेश स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन परीक्षा भी दी थी। उनकी ट्रेनिंग के दौरान ही एमपीपीएससी परीक्षा का रिजल्ट आ गया। उन्होंने परीक्षा पास कर ली थी। पहले ही प्रयास में महिला कैटेगरी में वह 17वें स्थान पर आईं और सभी कैटेगरी में वह 47वें नंबर पर रहीं। अनीता डीएसपी रैंक के लिए चयनित हो गईं। वह खूबसूरत इतनी हैं कि अगर आपको उसकी पृष्ठभूमि और हालात पता न हो तो यही कहेंगे कि ‘ये कौन सी हीरोइन है।’

अनीता की बोलती आंखों में हजारों सपने तैर रहे हैं। महज 25 साल की उम्र में उसने जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव देख लिए हैं। लेकिन जज्बा ऐसा कि हार मानने को तैयार नहीं। राह में आती बाधाओं पर पार पाते हुए वह आज राजपत्रित पुलिस अधिकारी बन गई हैं। अभी वह और ऊपर जाना चाहती हैं। महज 25 वर्ष की उम्र में इतना सब कुछ हासिल करने का जज्बा बहुत कम लोगों में दिखता है। अनीता ने अपने जैसी न जाने कितनी प्रतिभाशाली लड़कियों के लिए राह खोल दी है।

सदियों पुराने इमली के पेड़ में हुआ चमत्कार, जड़ से निकला शिवलिंग…

इस पृथ्वी की रचना भगवान द्वारा की गयी। पृथ्वी पर सबसे पहले छोटे जीवों की रचना की गयी, उसके बाद बड़े विशालकाय जीवों ने इस पृथ्वी पर अपना जीवन जिया। उसके बाद बारी आयी इंसानों की। इंसानों की उत्त्पत्ति के समय से ही वह किसी ना किसी को अपने इष्ट के रूप में पूजता आया है। शायद यही वजह है कि कभी वह किसी जानवर की पूजा करता था तो कभी किसी पेड़ की। भारत में बहुत पहले से ही पेड़ों को पूजनीय माना जाता है, और इन पेड़ों की पूजा की जाती है। कुछ पेड़ तो इतने पुराने हैं, जिनकी सही उम्र का पता लगाना काफी मुश्किल है।

कुछ लोग नहीं करते ईश्वर में यकीन:

अगर बात भगवान के अस्तित्व की करें तो कुछ लोग इस पृथ्वी पर ऐसे हैं जो ईश्वर में यकीन नहीं करते हैं। ऐसे लोगों को नास्तिक कहा जाता है। जबकि कुछ लोग ईश्वर में बहुत ज्यादा यकीन करते हैं। जो लोग ईश्वर में यकीन नहीं करते हैं, समय-समय पर ईश्वर उन्हें अपना चमत्कार दिखाते हैं। ऐसा ही एक चमत्कार बाबा महाकाल की नगरी में हुआ है। इस घटना को देखकर सभी लोग अचंभित है।

लोगों ने शुरू कर दी शिवलिंग की पूजा:

दरअसल अखण्ड कालोनी में एक 100 साल से भी ज्यादा पुराना इमली का पेड़ था। जिसको काटा गया तो उसकी जड़ों से शिवलिंग निकला। यह देखकर सभी लोग हैरान हो गए हैं। जैसे ही यह खबर शहर के लोगों को पता चली इस जगह पर पूजा पाठ शुरू कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार जयसिंहपूरा के अखंड कालोनी के रहने वाले लक्ष्मी नारायण के प्लाट पर काफी पुराना इमली का एक पेड़ था। पेड़ की जड़ें सूख गयी थीं, इसलिए पेड़ को काटना जरूरी हो गया था।

करवाया जायेगा शिव मंदिर का निर्माण:

जब पेड़ को काटा गया तो इसकी जड़ से एक शिवलिंग प्राप्त हुआ। यह देखकर पूरे इलाके के लोग हैरान हैं। शिवलिंग की पूजा के लिए भक्तों की भीड़ लग गयी है। लोगों का कहना है कि अब इस जगह पर शिव मंदिर का निर्माण करवाया जायेगा। पेड़ का निचला हिस्सा काफी चौड़ा था, कटाई के समय वह फट गया और लोगों को एक पत्थर दिखाई दिया। जब ध्यान से देखा गया तो वह कोई आम पत्थर नहीं बल्कि एक शिवलिंग था। शिवलिंग मिलते ही पेड़ को काटने का काम रोक दिया गया।

जानिये क्यों गैस सिलेंडर पर लिखा ये नम्बर है बेहद महत्वपूर्ण, पर 98% लोग हैं इस बात से अनजान

आधुनिक सुविधाएं मानव जीवन के लिए जितनी लाभदायक है उतनी ही खतरनाक भी हैं .. गैस सिलेंडर भी ऐसी ही चीज है। रसोई गैस के प्रयोग से महिलाओं का जीवन आसान तो हो गया है पर इसके खतरे भी कम नही है। आए दिन गैस सिलेंडर फटने से होने वाली भयानक दुर्घटनाओं की खबर सुनने को मिलती रहती है। ऐसे में इसका इस्तेमाल करते समय हमें आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए जैसे कि ज़रा सी भी लीकेज की आशंका हो तो उसे नजर अंदाज ना करें।

साथ ही कुछ ऐसी बाते भी हैं जिनपर हम गौर नही करते जबकि वो हमारे लिए बेहद जरूरी होती हैं ..आज हम आपको रसोई गैस सिलेंडर से समबन्धित एक ऐसी ही जरूरी बात बताने जा रहे हैं जो आपको इसके खतरों से बचा सकती है।

रसोई गैस सिलेंडर से समबन्धित जरूरी सुचना :

कई बार ऐसा होता है कि हम जिन चीजों का इस्तेमाल कर रहे होते हैं उन्ही के बारे में हमें जरूरी जानकारी नही होती है और आज हम जो जानकारी आपको देने जा रहे हैं वो भी कुछ ऐसी है।ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता नही है। दरअसल हम बात कर रहे हैं गैस सिलेंडर पर लिखे एक विशेष कोड नम्बर की जो सिलेंडर के सबसे ऊपर रेगुलेटर के पास जो तीन पट्टी लगी होती है उन में से किसी एक पर लिखा होता है जैसे ऊपर दी हुई तस्वीर में दिखाया गया है।

आपका ध्यान भी कई बार इस नम्बर पर गया होगा पर क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि ये नम्बर क्या है और क्यों लिखा होता है। अधिकांश लोगों को इस नम्बर का सही मतलब नही पता होता है जबकि ये नम्बर हर रसोई गैस उपभोक्ता की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद उपयोगी है। चलिए हम आपको बताते हैं इसका सही मतलब।

दरअसल यह नंबर गैस सिलेंडर का एक्सपायरी डेट बताता है और इस एक्सपायरी डेट खत्म होने के बाद सिलेंडर कभी भी फट सकता है। इन नम्बरों की शुरूआत में A, B, C, D लिखा होता है जिसका मतलब यह है कि गैस कंपनी हर एक लेटर को 3 महीनों में बांट देते हैं, A का मतलब जनवरी से मार्च और B का मतलब एप्रिल से जून तक होता है ।उसी तरह से C का जुलाई से लेकर सितंबर और D का मतलब अक्टूबर से दिसंबर तक होता है ।इसके साथ इसमें वर्ष भी दिए जाते हैं उदाहरण के तौर पर A-17 का मतलब होता है कि गैस सिलेंडर का एक्सपायर डेट जनवरी से लेकर मार्च 2017 तक है ..इसके बाद सिलेंडर का उपयोग करना खतरनाक हो सकता है.. और इन खतरों में शामिल है गैस लीकेज से लेकर सिलेंडर का फटना तक।ऐसे में आप जब भी नया गैस सिलेंडर लें तो ये नम्बर जरूर चेक कर लें।

गैस कम्पनियां ये नम्बर अंकित कर अपनी जिम्मेदारी निभाती है ..हमें भी एक सजग उपभोक्ता के रूप में इस गौर जरूर करना चाहिए। चूंकि अभी भी ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता नही है इसलिए आप इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें ताकि हर कोई इसके बारे में जान सकें ..ये जानकारी लोगों की जान बचा सकती है।

सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली कंपनी के इस Ad में वो नकली ब्लू इंक नहीं, दिखेगी पीरियड्स की सच्चाई

पीरियड ब्लड को लेकर समाज में कितना Taboo है, इसका सबूत देने की ज़रूरत नहीं. इसे लेकर समाज की संकीर्ण सोच का असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है, जब वो खुल कर अपनी समस्याओं के बारे में बात नहीं कर पाती.

सबसे बड़ी विडंबना ये है कि पीरियड्स के लिए Sanitary Napkin बनाने वाले Brands भी Ad के दौरान पीरियड ब्लड की जगह ब्लू इंक दिखाते हैं. इन छोटे-छोटे Ads से लोगों की मानसिकता पर इस हद तक असर पड़ता है कि उनके लिए पीरियड ब्लड एक एलियन चीज़ हो जाती है.

लेकिन इस Taboo को तोड़ने की पहल की सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली कंपनी Bodyform ने. इन्होंने अपने कैंपेन #BloodNormal के ज़रिये ये बताने की कोशिश की है कि पीरियड्स में ब्लड दिखना नॉर्मल है.

इस कंपनी ने अपने कैंपेन में पहली बार रियल पीरियड ब्लड दिखाया. ये सच है, अभी तक टीवी में इससे सम्बंधित जो भी दिखाया जाता है, वो भ्रम से कम नहीं होता.

इस कैंपेन के वीडियो एक और बोल्ड सीन था, जिसमें एक आदमी को पैड लेते हुए दिखाया गया और सबसे अच्छी बात ये थी कि उस लड़के के चेहरे पर कोई अजीब भाव नहीं थे.

महिलाओं की ज़िन्दगी के इतने ज़रूरी पड़ाव को दिखाने के लिए और सही तरीके से दिखाने के लिए बधाई.

ये वीडियो आपके लिए भी ज़रूरी है!

भारतीय क्रिकेट टीम में कौन कितना पढ़ा लिखा हे जानने के लिए पढ़े !

आपके कई दोस्त होंगे जो की ये बात कभी कभी मस्ती में कहते होंगे ‘A sheet of paper can’t judge my life’ और इसका मतलब ये हे की परीक्ष्या में कोई एक पेपर ख़राब होने से उन्हें कोई फरक नहीं पड़ता। पर आपको और मुझे पता हे आजके दौर में पढाई लिखाई, मार्क्स, सर्टिफिकेट कितने मायने रखते हैं। जी हाँ ! हमारे पेरेंट्स हमें काफी फाॅर्स करते हैं पढाई के बारे में और हमें उतना सीरियस होना भी चाहिए।

अपने कभी न कभी आपके पसंदीदा एक्टर और एक्ट्रेस ने कितनी पढाई की हे उसकी जाँच तो की होगी। मेने भी किया हुआ हे भाई। फिर क्या कभी अपने अपने पसंदीदा क्रिकेटर के शिक्षागत योग्यता को बारे में सर्च किया है? आज हम आपके लिए लेके अये हैं कुछ क्रिकेटर के शिक्षागत योग्यता।

शिखर धवन !

आपको पता होगा की कुछ वक़्त पहले यही थे भारत के सबसे बेहतरीन ओपनर बैट्समैन अभी ये कुछ आउट ऑफ़ फॉर्म रहते हैं। इन्होने सिर्फ 12 वि तक पढाई की है।

विराट कोहली !

अभी के भारत के कप्तान यानि विराट कोहली जिनको दुनिया चीकू की नाम से जानती हे वो अभी तो अनुष्का शर्मा के साथ अपने प्रेम संबंध के लिए जाने जाते हैं। अभी हाल ही में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 -1 से सीरीज जीता कर अपना रुतवा और भी ऊपर किआ है। आपको पता होना चाहिए की विराट ने सिर्फ 12 वि पास हैं।

उमेश यादव !

अगर भारत के भरोशेमंद फ़ास्ट बोलेर की बात की जाये तो उमेश यादव का नाम पहले आएगा। इन्होने अपने जादुई गेंदबाज़ी से कई मैच भारत के झोली में डाले हैं। उमेश ने सिर्फ 12वि तक पढ़े हैं फिर उन्होंने भी स्कूल जाना बंद करदिया।

रविचंद्रन अश्विनी !

भारत के सबसे बेहतरीन स्पिनर गेंदबाज़ जिनके लिए भारत कई बार हारने से बच कर जित हासिल किया है।अश्विन ने पहले कई बार अपनी जादुई गेंदबाज़ी के द्वारा भारत को 1 नंबर पर टेक कर रखा है। पर अब वो भारतीय टीम से दूर हैं। आपको बता दें अश्विनी एक इंजीनियर हैं।

ऍम एस धोनी !

भारीतय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान यानि महेंद्र सिंह धोनी जिन्हने अपने खेल के वजह से भारत को 3 ICC टूर्नामेंट में जित दिला दिए हैं। उन्होंने बी.कॉम करते हुए पढाई से तंग आकर आधे में छोड़ दिया क्यों की उन्हें अपने क्रिकेटर बनने का सपना पूरा करना था।

युवराज सिंह !

आपको तो पता हे युवराज के छे छक्के और उनके मैन ऑफ़ थे टूर्नामेंट के वजह से हम दो बर वर्ल्ड कप जीते हैं। तो आपको बता दें की युवराज भी सिर्फ 12वि के बाद पढाई छोड़ दिए।

Image Source OMGINDIAN