इंडोनेशियाच्या नोटेवर गणपती बाप्पा…यामागचं कारण वाचून तुम्हाला अभिमान वाटेल!!!

इंडोनेशियातल्या नागरिकांत मुस्लीम लोकांची संख्या खूप जास्त आहे. पण तरीही तिथं हिंदू धर्माची पाळंमुळंही खोल गेली आहेत हे त्या देशात गेल्यावर नक्कीच दिसतं. तिथं जवळ जवळ ८७% लोक हे मुस्लीम आहेत आणि फक्त ३% हिंदू लोकवस्ती आहे. एवढा फरक असूनही इंडोनेशियाच्या २०,००० च्या नोटेवर इंडोनेशियाचे क्रांतिकारक ‘की हजर देवान्तर’ यांच्या सोबत चक्क ‘गणपती बाप्पा’ विराजमान आहेत, हे बघून आश्चर्याचा मोठाच धक्का बसतो.

गणपतीला कला, शास्त्र आणि बुद्धीची देवता म्हणून मानलं जातं आणि इंडोनेशियावर जेव्हा डच लोकांच राज्य होतं त्यावेळी की हजर देवान्तर हे शिक्षणाचे आद्यप्रवर्तक होते. या दोन कारणांवरून दोघेही एकत्र नोटेवर दिसतात. नोटेची मागील बाजू बघितल्यास ही बाब खरी असल्याचं आपल्या लक्षात येईल. मागील बाजूस वर्गात शिकत असलेल्या विद्यार्थ्यांचं चित्र आहे.

लाल कृष्ण अडवाणी यांनी जेव्हा इंडोनेशियाला भेट दिली तेव्हा त्यांना हिंदू मुस्लीम यांच्यातला एकोपा बघून धक्का बसला होता. इंडोनेशियात खऱ्या अर्थाने दोन्ही धर्मातली दरी मिटलेली पाहायला मिळते.
इंडोनेशिया आणि भारताचा व्यापारी संबंध खूप पूर्वीपासून चालत आला आहे मंडळी…आणि याच व्यापारी संबंधातून सांस्कृतिक देवाणघेवाण झाली. एवढंच काय आपल्याकडील रामायणाचं तिथं वेगळं वर्जन पाहायला मिळतं. काही काळानं इंडोनेशियात मुस्लिम धर्म पसरत गेला, पण मूळची पूर्वापार चालत आलेली संस्कृती या बदलातही तग धरून राहिलीय.

परफेक्ट फोटो को खींचने में फोटोग्राफर को लग गए छह साल, किए 7 लाख से ज्यादा क्लिक

कहते हैं कि व्‍यक्ति जब किसी काम को करने की ठान ले तो उसे कभी न कभी उस काम में सफलता जरूर मिल जाती है। इसी कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है फोटोग्राफर एलन मैकफैदयन ने। उन्‍होंने करीब छह साल के कठोर व एकचित्‍त परिश्रम और करीब 720,000 फोटो खींचने के बाद किंगफिशर पक्षी की एक बेमिसाल तस्‍वीर कैमरे में कैद की है। उन्‍होंने इस फोटो को अपने दिवंगत दादा जी को समर्पित किया है।

करीब 40 साल पहले एलन मैफेदयन (46) जब छोटे थे, तब उनके दादाजी रॉबर्ट मुरे उन्‍हें किंगफिशर का घोसला दिखाने झील के किनारे ले गए थे। बड़े होने के बाद भी एलन बचपन की उस घटना को नहीं भूले थे। इसलिए तकरीबन छह साल पहले उन्‍होंने वहां की फोटोग्राफी करने की ठानी और निर्णय लिया कि किंगफिशर किस तरह ध्‍यान लगाकर पानी में डुबकी लगता है, जब पानी की एक बूंद भी नहीं उछलती है, वह उस स्थिति को फोकस करेंगे। इसके लिए वह रोजाना सैकड़ों फोटो खींचते थे ताकि किंगफिशर की उस खूबसूरत मुद्रा को कैमरे में कैद किया जा सके, जब वह पूरे मनोयोग से पानी में गोता लगाकर शिकार करता है। इसके लिए हर साल जब ज्‍वार का पानी किंगफिशर के घोसलों में भर जाता था, तब एलन एक छेद में मिट्टी व पानी मिलाकर इस पक्षी के लिए घोसला तैयार कर देते थे। इन छह सालों में एलन कई बार वहां जाकर किंगफिशर की पानी में गोते लगाते हुए फोटो खींचते थे। ऐसे में आखिर एक दिन उन्‍हें अपने सपनों का फोटो (perfect shot) खींचने में कामयाबी मिल ही गई, जिसके लिए वे इतने लंबे समय से प्रयासरत थे।

तीन बच्‍चों के पिता एलन ने इसके लिए करीब 4200 घंटे लगाए और 720,000 फोटो खींचे, तब जाकर उन्‍हें यह परफेक्‍ट फोटो मिल पाया जब किंगफिशर पानी में गोता लगा रहा है और जरा भी पानी नहीं उछल रहा है। एलन ने कहा कि विश्‍व में बिरले ही लोग होंगे जिन्‍होंने इस तरह का शॉट खींचा होगा क्‍योंकि किंगफिशर पानी में बंदूक की गोली की तरह काफी तेजी से गोता लगाता है। इस तरह के फोटो के लिए अच्‍छी किस्‍मत और काफी धैर्य की जरूरत होती है। एलन ने बताया कि उनके दादाजी का वर्ष 1994 में 78 साल की उम्र में निधन हो गया था, एलन को इस बात का दुख है कि वह उन्‍हें किंशफिशर की फोटोग्राफी करते हुए नहीं देख सके।

और कुछ रोमांचक तस्वीरे देखेंगे

‘बाई वाड्यावर या….’ असं म्हणणा-या निळू फुलेंबाबत या गोष्टी तुम्हालाही माहित नसतील

हीच नजर, सूचक हावभाव आणि संवाद हे निळू फुले यांचं खरं बलस्थान होते. काही कारणासाठी निळूभाऊ गावोगाव गेल्यानंतर तिथल्या शिक्षिका, नर्स त्यांच्यापासून चार हात दूर रहायच्या. ही त्यांच्या अभिनयाला खरी पावती होती. लहानपणापासूनच निळूभाऊंच्या अंगात खोडकरपणा होता.बहिणींची ते खोड काढायचे मात्र त्यांच्यावर तितकंच प्रेमही होतं. बालपणापासूनच निळूभाऊंना अभिनयाची प्रचंड आवड होती.

ना गब्बर सारखी बडबड, ना मोगॅम्बोसारखी आरडाओरड. मात्र त्यांच्या आवाजात होता भारदस्तपणा. घोग-या, बसक्या आवाजातून फुटणारा शब्द समोरच्या व्यक्तिरेखेचाच नाही, तर पाहणा-या तटस्थ प्रेक्षकाच्या मनालाही भितीच्या कवेत घेऊन यायचा. ही ओळख आहे निळू भाऊ अर्थात निळू फुले यांच्या असामान्य अभिनय क्षमतेची. त्यांची बेरकी नजर प्रेक्षकांच्याही आरपार जायची. हीच नजर, सूचक हावभाव आणि संवाद हे निळू फुले यांचं खरं बलस्थान होते. काही कारणासाठी निळूभाऊ गावोगाव गेल्यानंतर तिथल्या शिक्षिका, नर्स त्यांच्यापासून चार हात दूर रहायच्या. ही त्यांच्या अभिनयाला खरी पावती होती. निळू फुले यांचा जन्म १९३० मध्ये पुणे येथे झाला . घरात 11 बहिण भाऊ, त्यांचे वडील लोखंड आणि भाजी विकून मिळणा-या पैशांवर चरितार्थ चालवत होते.

लहानपणापासूनच निळूभाऊंच्या अंगात खोडकरपणा होता.बहिणींची ते खोड काढायचे मात्र त्यांच्यावर तितकंच प्रेमही होतं. बालपणापासूनच निळूभाऊंना अभिनयाची प्रचंड आवड होती. आपली अभिनय करण्याची इच्छा पूर्ण करण्यासाठी त्यांनी स्वतः १९५७ मध्ये ‘ येरा गबाळ्याचे काम नोहे ‘ हा वग लिहिला . त्यानंतर पु . ल . देशपांडे यांच्या नाटकात ‘रोंगे ‘ ची भूमिका साकारुन त्यांनी सगळ्यांचे लक्ष वेधून घेतले . मात्र ‘ कथा अकलेच्या कांद्याची’ या वगनाट्यातील भूमिका आणि सखाराम बाईंडरमुळे ते ख-या अर्थाने कलाकार म्हणून पुढे आले. अनेक नाटक आणि सिनेमात त्यांनी विविधरंगी भूमिका साकारल्या. सिंहासनमधला पत्रकार आणि विनोदी भूमिकाही त्यांनी खुबीने वठवल्या. मात्र रसिकांना त्यांचा खलनायकच भावला. त्यांच्या सिनेमात एकतरी बलात्काराचा सीन असायचाच. यावर विनोद करताना निळूभाऊ म्हणायचे, “कथा तिच, बलात्कारही तोच, बाई ही तीच, कमीत कमी तिची साडी तरी बदला”.

निळूभाऊंनी अडीचशेहून अधिक सिनेमांमध्ये आपल्या भूमिका आपल्या अभिनयानं गाजवल्या… मात्र रंगभूमीवर काम करताना त्यांना वेगळाच आनंद मिळायचा. सखाराम बाईंडर या नाटकात साकारलेल्या सखारामच्या भूमिकेनं तर निळूभाऊंना यशशिखरावर पोहचवलं. या नाटकाला अभिनेता अमरीश पुरी यांनी हिंदीत साकारण्याचा प्रयत्न केला. मात्र निळूभाऊंच्या अभिनयाची उंची इतकी होती की सखारामच्या भूमिकेला त्यांच्याशिवाय कुणीच न्याय देऊ शकणार नाही असे गौरवोद्गार अमरीश पुरी यांनी काढले.

समाजासाठीच कला ही शिकवण त्यांनी आयुष्यभर जोपासली. सेवादलाच्या कलापथकात काम करीत असताना आपल्या नोकरीच्या कमाईतील १० टक्के वाटा समाजासाठी, सेवादलाच्या उपक्रमांसाठी देण्याचा नियम त्यांनी कसोशीने पाळला. पुढेही नाटके, चित्रपट यांच्या माध्यमातून सामाजिक कृतज्ञता निधी उभा केला. समाजाचे ऋण मानणार्‍या, माणुसकी जपणार्‍या, संवेदनशील अशा या ज्येष्ठ कलाकारानं १३ जुलै २००९ रोजी जगाचा निरोप घेतला.

आईटी सेल का इंजीनियर और EVM हैकर पकडे गये, खुलासा करते हुए बोले कि…..

पूरे देश में अभी EVM को लेकर हैक होने की जैसी चर्चाएँ जोर शोर से हो रही थी और साथ ही साथ यूपी के निकाय चुनाव में जैसे EVM में गड़बड़ी के मामले सामने आये कि किसी को भी वोट देने पर वोट दुसरे को जा रहा था तब भी चुनाव आयोग इस ओर ध्यान देने को राजी नहीं था | गुजरात में भी चुनाव सर पर हैं और वहां से भी VVPAT मशीन की वीडियो और हैक होने की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही थी |

पकड में आ गया EVM हैक करने वाला

अभी इस EVM की हैकिंग की सत्यता को लेकर नया मामला तब सामने आया जब शिमला पुलिस ने सचिन राठौर नाम के एक आदमी को गिरफ्तार किया | पुलिस की जांच में ये बात सामने आई और खुद सचिन ने ही इसको कबूल किया है कि भारत के अंदर चुनाव को लेकर प्रयोग होने वाली EVM मशीन को चुटकियों में हैक कर सकता है और किसी को भी जिता सकता है |

पार्टि के आईटी सेल में करता था काम

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सचिन राठौर बडी पार्टि की आईटी सेल में काम कर चुका है | अभी हिमाचल प्रदेश के विधानसभा के चुनाव के चलते सचिन राठौर ने वहां के कई नेताओं से संपर्क किया था और उनसे इस बात का दावा किया था कि वो किसी भी EVM को हैक करके किसी को भी जिता सकता है | सचिन ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से संपर्क किया और उनसे उन्हें जिताने के एवज में 10-10 लाख रुपयों की मांग की थी |

पुलिस से कुछ नेताओ ने जानकारी कर दी लीक

अब हुआ ऐसा कि कुछ नेताओ ने सचिन का साथ न देते हुए इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से कर दी | इसके बाद शिमला की पुलिस हरकत में आगयी और सचिन के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर ली गयी | जब सचिन राठौर के खिलाफ केस दर्ज हो गया तो उसको पकड़ने के लिए शिमला पुलिस ने एक टीम का गठन किया और इस टीम ने सफलतापूर्वक सचिन को महाराष्ट्र के नांदेड जिले के किनवटसे गिरफ्तार कर लिया |

पुलिस ने देशद्रोह का बनाया है मामला

सचिन को गिरफ्तार करके शिमला के ही जिला और सत्र नयायाधीश के आवास पर पेश किया गया है | आरोपी के खिलाफ केस बनाते हुए शिमला की पुलिस ने इंडियन पीनल कोड की धारा 502 (2) के तहत गलत जानकारी देने और धारा 1442(ए) के तहत देशद्रोह का मामला बनाया है |

पुलिस ने इस मामले में सफलता पूर्वक गिरफ्तारी के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि सचिन राठौर ने हिमाचल के तकरीबन 30 नेताओ से मैसेज द्वारा संपर्क करने की कोशिश की थी | अब पुलिस इस बात की जानकारी जुटाने में लगी हुई है कि कितने नेता इस आरोपी की बातों में आगये थे और कितने नहीं |

देखिये अम्बानी परिवार और उनके सदस्यों में आये बदलाव को !

मुकेश अम्बानी इस देश में ऐसा नाम है जिसे किसी परिचय की जरुरत नहीं है! वह इस देश के सबसे अमीर बिजनेसमैन है! वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक है! मुकेश अम्बानी तो हमेशा सुर्खियों में रहते ही है साथ ही साथ उनकी पत्नी नीता अम्बानी भी अपने ग्लैमरस लाइफस्टाइल की वजह से सुर्खिया बटोरती रहती है! मुकेश और नीता के तीन बच्चे है वो भी काफी शान शौकत भरी जिंदगी जीते है! अम्बानी लगभग 35 साल से काम कर रहे है! इन बीते सालो में सिर्फ मुकेश अम्बानी ही नहीं बल्कि उनकी पूरे परिवार के लोगो के लुक्स में बदलाव आया है! एक ज़माने में साधारण जिंदगी जीने वाले बच्चे अब काफी ग्लैमरस हो चुके है! चलिए आपको दिखाते है की इतने सालो में इन परिवार के सदस्यों के लुक्स में क्या बदलाव आया है!

नीता अम्बानी

मुकेश अम्बानी की पत्नी नीता अम्बानी एक मिडिल क्लास फॅमिली से है! नीता गर्व से अम्बानी होने के साथ उनमे मिडिल क्लास गर्ल की अच्छी क्वालिटीज़ भी है! नीता और मुकेश की शादी साल 1985 में हुई थी ! इस बाद से तो लगभग सभी परिचित है की दोनों की लव मैरिज थी! आज नीता चेयरपर्सन होने के साथ रेलाइन्स फाउंडेशन की फाउंडर है और रिलायंस इंडस्ट्रीज की नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी है! इसके अलावा आईपीएल में उनकी मुंबई इंडियन टीम भी है!

अनंत अंबानी

अनंत अम्बानी परिवार का छोटा बेटा है! बचपन में उन्हें chronic asthma हो गया था और दवाइयों की वजह से उनका वेट काफी बढ़ गया था! लेकिन हाल ही में अनंत सुर्खियों में छाए हुवे थे जिसमे उनके वजन कम करने के बारे में बताया जा रहा था! आप उनकी अभी की फोटो को पहले के मुक़ाबले देखेंगे तो आपको यकीन ही नहीं होगा! उन्होंने केवल 18 महीनो में अपनी मेहनत से 108 किलो वजन कम किया !

आकाश अंबानी

आकाश घर में मुकेश और नीता के सबसे बड़े बेटे है! साथ ही साथ वह जिओ में चीफ ऑफ़ स्ट्रेटेजी है! पहले आकाश थोड़े मोटे थे लेकिन अब उन्हें देखने पर ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता है! उन्होंने भी खुद को फिट कर लिया है!

ईशा अंबानी

ईशा भी मुकेश और नीता अम्बानी की बेटी है! उन्होंने साइकोलॉजी से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की है! ईशा को जिओ के बोर्ड में डायरेक्टर्स में शामिल किया गया था! उन्होंने 2008 में फोर्बेस में अपनी नेट वर्थ की वजह से दूसरा स्थान प्राप्त किआ था!

मुकेश अंबानी

मुकेश अम्बानी अपने पिता धीरूभाई अम्बानी के बड़े बेटे है! उनकी माँ का नाम कोकिलाबेन है और छोटे भाई का नाम अनिल अम्बानी है! मुकेश ने बिज़नेस की शुरुवात करने के लिए बीच में ही अपनी MBA की पढ़ाई छोड़ दी थी! आज के दौर में मुकेश के कई बिज़नेस है! बीते 10 साल से अब तक अम्बानी ही भारत के सबसे अमीर इंसान है!

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अनचाहे बालों को सिर्फ 5 मिनट में हटा सकता है कोलगेट, बस आजमाये ये जबरदस्त नुस्खा

बाल कुदरत की दी हुई अनमोल नेमत है, ये बात वही समझ सकता है जिसके सिर पर बाल न हो। लेकिन बाल कुदरत की दी हुई सबसे बुरी चीज भी है, ये बात वो समझ सकता है जिसके शरीर के अनचाहे हिस्सों पर भी बाल हो। ऐसे महिला हो या पुरुष जिनके शरीर पर अनचाहे बाल ऐसी जगह हो जहाँ से वो उसे हटाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, तो आज हम उसे ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जिससे एक बार गये बाल दुबारा वापस नहीं उग सकेंगे।

अनचाहे बालों से हर कोई है परेशान

अक्सर देखा जाता है कि कुछ लड़कियों का अपने हाथ, पैर और चेहरे के बालों को हटाने के लिए हर हफ्ते ब्यूटी पार्लर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ढेर सा पैसा खर्च करने के बाद भी उनकी ये परेशानी कभी खत्म नहीं होती। वहीं लड़को या पुरुषों के शरीर के ऐसे हिस्सों पर भी बाल होते हैं जिन्हें वो हटाने के लिए कई तरीके आजमाते हैं, लेकिन उन्हें भी इससे निजात नहीं मिलता है। बाल अगर किसी लड़की के चेहरे पर उग आये तो ये उसके लिए एक अभिशाप के जैसा हो जाता है। इसलिए हर सुन्दर व खूबसूरत दिखने के लिए अपने शरीर से अनचाहे बालों को हटाना चाहता है।

कितने कारगर है ब्यूटी प्रोडक्ट?

अनचाहे बालों से न सिर्फ किसी की खुबसूरती खत्‍म होती है, बल्कि उसे खुद भी बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए पुरुष और महिलाएं वैक्सिंग का सहारा लेती हैं, लेकिन इससे उन्हें बेतहाशा दर्द झेलना पड़ता है। वैक्सिंग अनचाहे बालों को कुछ दिनों के लिए हटने का विकल्प है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई ब्यूटी प्रोडक्ट नहीं है जो अनचाहे बालों को हमेशा के लिए हटा सके। लेकिन, यह समस्या अब दूर हो गई है। हम जो नुख्सा आपको बताने जा रहे हैं उससे आप अनचाहे बालों को हमेशा के लिए हटा सकते हैं।

अनचाहे बालों को कैसे हटा सकता है कोलगेट?

यह एक चमत्कारी नुख्सा है। इसके लिए पहले आपके पास एक कोलगेट और एक एवरयूथ पील मास्‍क पैक होना चाहिए। कोलगेट के सफेद पैक इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर होता है। इसके लिए आप सबसे पहले एक कटोरी में 2 चम्‍मच एवरयूथ पील मास्‍क और एक चम्‍मच कोलगेट ड़ालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें। शरीर के जिस हिस्से के बाद को हटाना हो वहां इस पेस्‍ट को लाने के बाद 20 मिनट तक छोड़ दें। जब यह पूरी तरह से सुख जाये तो इसे धीरे-धीरे करके हटा लें। इससे आपको दर्द भी नहीं होगा और उस हिस्से पर दोबारा बाल भी नहीं उगेंगे।

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“भाभियों” के ठुमकों ने इंटरनेट पर मचाई सनसनी… देखिए यह वायरल वीडियो

भारत में लोगों पर डांस का जूनून कुछ ज्यादा ही है। जब कोई डांस के मूड में आ जाए तो धूल भरी सड़क पर भी लोटकर नागिन डांस करने लगता है। हर शादी में एक ऐसा व्यक्ति होता है जो अपने नागिन डांस से लोगों का मनोरंजन करता है। लेकिन आज हम बात दो भाभियों का करने जा रहे हैं। जिसने वीडियो ने इंटरनेट पर सनसनी फैला रखी है। bhabhi dance on road.

बीच सड़क भाभियों ने मारे ठुमके
इंटरनेट पर एक वीडियो खुब वायरल हो रहा है, जिसमें दो भाभियां बीच सड़क पर जबरदस्त डांस करते दिख रही हैं। इस वीडियो में दो भाभियों ने सड़क पर टूटकर ठुमके लगा रही हैं। हालांकि, यह वीडियो कहां का और ये कौन लोग हैं इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। इस वीडियो को Vogs नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है। अभी तक इस वीडियो को 30 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

नहीं देखा होगा इतना हॉट डांस
पिछले कुछ दिनों में आपने लड़कियों के हॉट डांस का वीडियो खूब देखा होगा। लेकिन कभी आपने किसी भाभी के हॉट डांस का वीडियो नहीं देखा होगा। अगर देखा भी होगा तो इतना हॉट डांस नहीं देखा होगा। आज हम आपको दो भाभियों हॉट का डांस वीडियो दिखाने जा रहे हैं, जिसे देखने के बाद आप सबकुछ भूल जायेंगे। भाभियों ने लड़कियों को भी अपने डांस से पटखनी दे दी है। इन भाभियों के डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जबरदस्त अंदाज में किया डांस
भाभियों ने साड़ी पहनकर जिस तरह से डांस किया है। उनकी अदाएं देखने लायक हैं। इस डांस वीडियो को अब तक लाखों लोगों ने देखा है। यह वीडियो आजकल सोशल मीडिया पर जमकर छाया हुआ है। सोशल मीडिया पर आये दिन डांस के वीडियो वायरलहो रहे हैं। पहले लोग डांस करते थे, तो उसे कुछ ही लोग देख पाते थे, लेकिन अब उनके डांस को देखने वाले लाखों लोग हैं। किसी की प्रतिभा सोशल मीडिया के दौर में छुपी नहीं रह सकती है। जो भी व्यक्ति कुछ भी जनता है, वह अपना हुनर दिखाने से पीछे नहीं हट रहा है।

देखें वीडियो –

योग साधना की महाशक्ति – हड्डियां जमा देने वाली बर्फ पर इन साधुओं की जिंदगी है जिंदाबाद!

हिमाचल की हड्डियां जमा देने वाली बर्फ पर जहां जाने की सोचकर हमारी रुह तक कांप जाये वहीं एक जोगी ऐसा भी है जो वर्षों से ऐसी सर्द मौसम में वहां तपस्या कर रहा है। 11,965 फीट की ऊंचाई पर 12 से 15 फीट की सफेद चादर पर हड्डियां जमा देने वाली देने वाली इस सर्दी में जहां कम कल्पना भी नहीं कर सकते वहीं आस्था और योग साधना की अद्भुत क्षमता के दम पर चूड़धार में यह साधु अपनी साधना में लगे हुए हैं। उनके खाने का इंतजाम भी वहीं किया जा रहा है। ये साधु अपने लिए पीने के इंतजाम बर्फ को पिघलाकर करते हैं।

बर्फ से ढक़ी चूड़धार चोटी का नजारा है अद्भुत –

इस सर्द मौसम में बर्फ से ढ़की चूड़धार चोटी पर योग साधना करने वाले इस जोगी का नाम ब्रह्मचारी स्वामी कमलानंद गिरि है। स्वामी कमलानंद गिरि के साथ मंदिर के पुजारी पंडित कृपाराम शर्मा व उनके शिष्य काकूराम भी स्वामी की सेवा व भगवान शिरगुल महाराज की भक्ति में लीन हैं। चूड़ेव्श्रार सेवा समिति के प्रबंधक बाबूराम के मुताबिक चूड़धार में इस समय 12 फीट तक बर्फबारी हुई है लेकिन चोटी पर मौजूद तीनों साधु सकुशल हैं। चूड़धार में प्राचीन शिरगुल मंदिर का हाल ही में जीर्णोद्घार किया गया है। जिससे पहले की अपेक्षा अब प्राचीन मंदिर 25 फीट अधिक ऊंचाई पर हो गया है। ऊंचाई बढ़ने के कारण मंदिर का आखिरी छोर बर्फ में नहीं डूबा है और मंदिर में पूजा अर्चना का कार्य जारी है।

आस्था की शक्ति ने संजो रखा है जीवन –

ऊंचाई 11,965 फीट। 12 से 15 फीट बर्फ की सफेद चादर और इतनी ऊंचाई पर जीवन अपनी आप में एक मिसाल है। यह आस्था का ही नतीजा है कि असम्भव परिस्थितीयों में भी वहां जीवन संभव हो सका है। हाड कंपकंपा देने वाली ऐसी ठंड में रुकने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता लेकिन आस्था और योग साधना से चूड़धार में तीन जिंदगियां जीवन यापन कर रही हैं। गौरतलब है कि लगभग पांच साल पहले जब ब्रह्मचारी स्वामी कमलानंद जी ने अकेले ही चोटी पर रहने का फैसला किया था तब चोटी के तराई वाले क्षेत्रों में स्वामी जी की कुशलता को लेकर हड़कंप मच गया था। स्वामी जी की कुशलता जानने के लिए जान जोखिम में डाल कर कुपवी क्षेत्र के लोगों का एक दल चोटी पर भी पहुंच गया था। तभी से स्वामी जी को चोटी पर अकेले नहीं रहने दिया जाता।

भारतीय तरूण अबुधाबीत एका रात्री झाला करोडपती….

परवाला जब भी देता, देता छप्पर फाडके… अशी म्हण एका भारतीय तरूणाच्या बाबतीत खरी ठरली आहे. अबुधाबीत राहणाऱ्या एका भारतीयाला तब्बल १२ कोटींची लॉटरी लागली आहे. गेली नऊ वर्षं नोकरीनिमित्त यूएईमध्ये अबुधाबीत राहणाऱ्या श्रीराज कृष्णन कोप्परेम्बिल या तरूणाला दरमहा सहा हजार धिरम (१,०८,००० रुपये) इतका पगार होता.

श्रीराज कृष्णन कोप्परेम्बिल हा मूळ केरळचा. अबूधाबीमध्ये तो शिपिंग को-ऑर्डिनेटर म्हणून काम करतो. लॉटरी काढून नशीब अजमावणं हा त्याचा छंदच. मोठ्या रकमेची लॉटरीची तिकिटं तो नियमितपणे खरेदी करायचा, पण नशीब काही चमकत नव्हतं. मात्र, ५ मार्चला चमत्कार घडला आणि कृष्णन करोडपती झाला.

आता हे शेवटचं तिकीट, असं म्हणून कृष्णननं ४४६९८ या आपल्या लकी नंबरचं लॉटरी तिकीट खरेदी केलं होतं. पण, नियतीच्या मनात काहीतरी वेगळं असावं. कारण, ७ दशलक्ष धिरम म्हणजेच १२ कोटी ७२ लाख २१ हजार ६२२ रुपयांची लॉटरीची भव्य सोडत ५ तारखेला निघाली आणि त्यात कृष्णनचा ‘लकी नंबर’च जाहीर झाला. कृष्णनला जेव्हा हे कळाले तेव्हा त्याचा आनंद गगनात मावत नव्हता. तो म्हणाला, ‘मला एवढी मोठी लॉटरी लागली यावर माझा विश्वासच बसत नाही आहे. उलट, यावेळी लॉटरी लागली नाही, तर पुन्हा हा खेळ खेळायचा नाही, असं मी ठरवलं होतं. त्यामुळे हे सगळं स्वप्नच वाटतंय, अशा भावना कृष्णनने व्यक्त केल्या.

आता या रकमेतून, केरळमधील घरासाठी काढलेलं कर्ज फेडायचं त्यानं ठरवलंय. उर्वरित रकमेचंही तो व्यवस्थित नियोजन करणार आहे. तसंच, अबुधाबी आपल्यासाठी लकी असल्यानं यापुढेही तिथेच राहायचं त्यानं पक्कं केलंय.

अलका कुबलच्या डोळ्यात आनंदाश्रू, मुलीची गगनभरारी!

एक काळ असा होता की मुलगी झाली म्हणजे आपण काही तरी पाप केले म्हणून मुलगी जन्माला आली. मुलींवर अनेक बंधने आणायची त्यांनी काय करावे काय नाही करावे हे घरच्यांनी आणि समाजानीच ठरवायचे. पण आता काळ बदलत चालला आहे. आज मुली चंद्रापर्यंत पोहोचल्या आहेत. वेगवेगळ्या क्षेत्रात महिलांची आघाडी लक्षणीय ठरत आहे, पुरुषांच्या खांद्याला खांदा लावून किंवा त्याच्यापेक्षाही एक पाऊल पुढे टाकत मुली काम करत आहेत.

डॉक्टरचा मुलगा डॉक्टर, इंजिनिअरचा इंजिनिअर आणि कलाकारांची मुलं कलाकारच होतात, असा समज आहे. मात्र याला अभिनेत्री अलका आणि समीर आठल्ये यांची मुलगी इशानी अपवाद ठरली आहे. कारण करिअरचा वेगळा मार्ग निवडत ती वैमानिक झाली आहे. वयाच्या 23 व्या वर्षीच तिने हे यश मिळवलं आहे. इशानीला व्यवसायिक वैमानिकाचा परवाना मिळाला आहे. त्यामुळे लहानपणापासून वैमानिक होण्याचं बाळगलेलं स्वप्न पूर्ण झाल्याने इशानीचा आनंद गगनात मावेनासा झाला आहे.

इशानीने 2015 सालीच अमेरिकेत व्यवसायिक वैमानिकाचा परवाना मिळवला होता. मात्र तिला भारतात यायचं होतं म्हणून इथे येऊन तिने अनेक परीक्षा दिल्या आणि अखेर भारतातही परवाना मिळवला.