भारत के इस जवान ने अकेले ही 72 घंटों में चीन के 300 सैनिक मार डाले थे

भारत का जवान – 17 नवंबर, 1962 को चीनी सेना ने चौथी बार अरुणाचल प्रदेश पर आक्रमण किया था। चीन, भारत के इस राज्‍य को चीन अपने कब्‍जे में लेना चाहते थे। उस समय चीन के इस सपने को गढ़वाल राइफल्‍स की चौथी बटालियन के राइफलमैन जसवंत सिह रावत ने अकेले ही अपने हौंसले से चकनाचूर कर दिया था।

ये युद्ध 20 अक्‍टूबर से शुरु होकर 21 नवंबर 1962 तक चला था। 17 नवंबर से 72 घंटों तक जसवंत सिंह पूरी बहादुरी के साथ चीन के आगे डटकर खड़े रहे। चीनी सेना की मीडियम मशीन गन की फायरिंग से गढ़वाल राइफल्‍स के जवान मुश्किल में पड़ गए थे। इस समय गढ़वाल राइफल्‍स के तीन जवानों ने पूरे युद्ध की दिशा ही बदलकर रख दी थी। इनमें से एक जसवंत सिंह ही थे।

ये तीनों युद्ध में भारी गोलाबारी के से बचते हुए चीनी सेना के बंकर के करीब जाकर दुश्‍मन की सेना के कई सैनिकों को मारते हुए उनसे उनकी एमएमजी छीन ली। बचे हुए सैनिकों ने भारत का जवान जसवंत के साथ उनके एक साथ त्रिलोक पर गोलियां चला दीं और ये दोनों शहीद हो गए। तीसरे सैनिक गोपाल सिंह ने आगे की घटना को अंजाम दिया।

अरुणाचल प्रदेश में भारत का जवान जसवंत सिंह की वीरता की कहानिंया सुनाईं जाती हैं। इस युद्ध के दौरान जसवंत अकेले ही 10 हज़ार फीट की ऊंचाई पर अपनी पोस्‍ट पर डटे रहे थे।

यहां जसवंत ने दो लड़कियों की मदद से अलग-अलग जगहों पर हथियार छिपाए और चीनी सेना पर हमला कर दिया। वो चीनी सेना की एक पूरी टुकड़ी से अकेले लड़ रहे थे। इस लड़ाई में जसवंत ने अकेले ही 300 से ज्‍यादा चीनी सैनिकों को मार गिराया था।

इस हिन्दू राजा के नाम से थर थर कांपते थे मुगल, मुगलों के लिए दहशत का दूसरा नाम बन गये थे!

जब हिन्दू बहुल भारत की धरती पर ही हिन्दुओ के “इतिहास” के साथ हमेशा अन्याय किया गया हो तो हम पाकिस्तान-बांग्लादेश जैसी हिन्दुओं की अल्पसंख्यक भूमि से कैसे अपेक्षा कर सकते हैं। भारतीय इतिहास ने न जाने हिन्दुओं का कितना ही इतिहास मिटाने और छिपाने के कितने ही प्रयास किये, मगर सच कभी छिपता नहीं! अक्सर प्रताप, शिवाजी, पुष्यमित्र शुंग, राजा दाहिर आदि के नाम तो अक्सर सुनने को मिल जाते हैं, मगर वीर बप्पा रावल जैसे कई अन्य राजाओं के नाम को शायद ही कोई जनता हो!

आपको जानकर हैरानी होगी कि बप्पा रावल एक ऐसे हिन्दू सम्राट रहे हैं, जिनके नाम भर मात्र से दुश्मनों के हाथ पाँव ठन्डे पड़ जाते थे। 734 ईसवी में जब भारत पर अरबों ने आक्रमण किया, तब राजस्थान में एक बप्पा रावल एक ऐसा योद्धा पैदा हुआ था, जिन्होंने उन्हें मार मार के वापस उनके देश तक खदेड़ा था। उस वीर हिन्दू योद्धा ने अरबी, तुर्क और फारसी मुस्लिमों के दिल में इतनी दहशत भर दी थी कि मुसलमानों ने अगले 400 साल तक हिंदुस्तान की ओर आँख उठा के नहीं देखा।

इनके राज के बाद मुगलों ने अगले 400 साल भारत की ओर आँख उठा कर देखने तक की हिम्मत नहीं की

बप्पा रावल के पिता महेंद्र रावल द्वितीय की आक्रमणकारियों द्वारा हत्या की गयी थी, जिसके बाद उनकी माता जी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए सती हो गयी थी। बचपन में ही माता पिता खो दने के बाद बप्पा रावल का पालन पोषण उनके कुलपुरोहित ने बड़े प्यार से किया और एकलिंग जी की भक्ति के साथ साथ समस्त युद्ध लालाओ में निपुण बनाया। उनके ही कारण बप्पा रावल ने अपना खोया हुआ राज्य मात्र 21 साल की उम्र में वापस ले लिया था और एक कुशल शासक के रूप में अपने को स्थापित किया।

युवा अवस्था में जब अरब, तुर्कों और फारसियो ने आक्रमण किया तो बप्पा रावल ने न केवल उन्हें युद्ध में हराया, बल्कि अरबो को वापस उनके देश तक खदेड़ा। उस दौरान बप्पा रावल का खौफ ऐसा था कि मुगलों ने अगले 400 साल भारत की ओर आँख उठा कर देखने तक की हिम्मत नहीं की। मेवाड़ वंश के संथापक, कालभोज के राजकुमार ‘बाप्पा रावल’ वीर हिन्दू राजा थे, जिन्हें शिव के एकलिंग रूप के भक्त और चितौड़ के किले के निर्माता के रूप में भी जाना जाता है!

पाकिस्तान के रावलपिण्डी का नामकरण बप्पा रावल के नाम पर

बेशक भारत के वामपंथी एवं भाड़े के इतिहासकारों ने उनके नाम को मिटाने और छिपाने की कोशिश की मगर सच कभी छिपता नहीं! आपको जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान के रावलपिण्डी का नामकरण बप्पा रावल के नाम पर हुआ था। उससे पहले तक रावलपिंडी को गजनी प्रदेश कहा जाता था और उसी समय कराची का नाम भी ब्रह्माणावाद था।

बता दें कि गजनी प्रदेश में बप्पा ने सैन्य ठिकाना स्थापित किया था, जहाँ से उनके सैनिक अरब सेना की गतिविधियों पर नजर रखते थे। बप्पा रावल की वीरता से प्रभावित गजनी के सुल्तान ने अपनी पुत्री का विवाह भी उनसे किया था, उस दौरान मेवाड़ में बप्पा व दूसरे प्रदेशों में इस वीर शासक को बापा भी पुकारा जाता था।

इन्हें मिला था हारीत ऋषि का आशीर्वाद

बडऩगरा (नागर) जाति के कमलावती के वंशजों के पास जीवन काटते समय अपने बचपन में बप्पा ब्राह्मणों की गायें चराने लगे। उन गायों में से एक बहुत अधिक दूध देती थी। जब शाम को वह गाय जंगल से वापस लौटती थी तो उसके थनों में दूध नहीं रहता था। दूध से जुड़े हुए रहस्य को जानने के लिए बप्पा जंगल में उसके पीछे चल दिए। जब गाय निर्जन कंदरा में पहुंची तो उसने हारीत ऋषि के यहां शिवलिंग अभिषेक के लिए दुग्धधार करने लगी। इस घटना के बाद बप्पा हारीत ऋषि की सेवा में जुट गए।

माना जाता है कि इन ऋषि के आशीर्वाद से ही बप्पा मेवाड़ के राजा बने थे। बाद में हारीत ऋषि द्वारा बताए गए स्थान से बप्पा को 15 करोड़ मूल्य की स्वर्ण मुद्राएं मिलीं। इस धन से बप्पा ने सेना निर्माण कर मोरियों से चित्तौड़ का राज्य लिया। और यहीं से मेवाड़ राजवंश की नींव पड़ी। इस कारण हम समझ सकते हैं कि इतने महान शासक के साथ इतिहास ने कितना अन्याय किया है!!!

इस लड़की के घिनोने कारनामे देख दंग रह जायेंगे आप!

राह चलते समय हो या कोई अनजाना सफर, पहली नजर में कौन इंसान कैसा है ये हमे कभी मालूम नही पड़ता। जिस तरह से आज आधुनिक दुनिया मे छल कपट बढ़ता जा रहा है, उसके बाद तो यह कहना और भी मुश्किल हो गया है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। हर रोज कुछ ऐसा ही घटना सामने आया है जिसे देखकर आपके होश उड़ जाते हैं…

तमाम अपराधों की तरह चोरी भी इन दिनों प्रमुख अपराध है. चोरी की ही एक घटना सामने आई है जिसने हर किसी का मुंह खुला रख दिया है। इस घटना को वीडियो के माध्यम से देख सकते हैं कि यह लड़की दुनिया की सबसे खतरनाक चोर है, जिसकी चोरी का पता लगाना बेहद मुश्किल है, पर अफसोस कि सीसीटीवी के दौर में यह घटना कैमरे में कैद हो गयी।

महिलाओं द्वारा चोरी की घटना एक सिलसिलेबार होती है जिसमे स्त्रियों की कलाबाजियां दिखाई गई है। इस दौरान औरतों की वेशभूषा इस तरह की होती है कि कितना भी बड़ा सामान अगर वो छिपा लें तो किसी को पता नही चलता। बस इसी बात का फायदा उठाकर इतने बड़े चोरी को अंजाम दिया गया है कि लोग अभी तक हैरान हैं।

इस वीडियो में भी यह साफ देखा जा सकता है कि यह लड़की जाती तो है खरीददारी करने, पर पलक झपकते ही सामान अपने वस्त्रों में छिपा लेती है। बेशक बात सभी औरतों की नही हो पर ज्यादातर मामलों में ऐसा ही पाया जाता है।

अक्सर जेवर की दुकानों पर यह पाया जाता है कि औरतें बातों ही बातों में गहना गायब कर देती हैं। इस चोरी की घटना को देखकर भी आप भौंचक्के रह जाएंगे क्योंकि पूरा का पूरा सूटकेस मात्र साड़ी में छिपा लिया इस महिला ने और किसी को शक तक नही हुआ।

इन घटना की यह वीडियो सामने आई है जिसे देखने के बाद आप भी दांतो तले उंगलियां दबा लेंगे। तो नीचे दिए गए वीडियो में दखें कि किस तरह खतरनाक तरीके से चोरी को अंजाम देती हैं औरतें…

इन 5 टिप्स से फ़र्क़ पहचाने असली और नकली ब्रैंड के गैजेट्स में

कुछ सालो से स्मार्टफोन्स ने हर घर और लगभग हर दुसरे इंसान की जेब में जगह बना ली है. ऐसे में कुछ बड़े ब्रांड्स लोगो के बीच में बहुत फेमस है. लोग इन फ़ोन्स के फीचर्स कम देखते है बल्कि इनके नाम के कारण हे गॅडजेट्स खरीदते है. ऐसे में कुछ लोगो ने फेक गैजेट्स बनाने का काम शुरू कर दिया है. वो इतना बारीकी से असली ब्रांड्स को कॉपी करते है की फ़र्क़ पहचानना मुश्किल होता है. आज हम आपको कुछ टिप्स बताएंगे जिससे आप असली ब्रांड और नकली में फ़र्क़ कर पाए.

मटेरियल की क्वालिटी

कोई भी मटेरियल चाहे वह प्लास्टिक, रबर, या एल्यूमीनियम हो, उच्च या निम्न गुणवत्ता का हो सकता है प्रसिद्ध ब्रांड मटेरियल में कोम्प्रोमाईज़ नहीं करते.

सेक्स डॉल से शादी करने वाले की हक़ीक़त जानने के बाद आप भी इस जोड़े को आशीर्वाद देंगे

हर चीज़ को देखने का सबका अपना-अपना अलग नज़रिया होता है. कोई चीज़ किसी के लिए आम है तो किसी दूसरे के लिए वो अचंभित करने वाली हो सकती है. अब जैसे चीन का एक किस्सा ले लीजिये.

यहां आज कल एक लड़का सोशल मीडिया पर अपने अजीबो-गरीब कारनामे की वजह से सुर्ख़ियों में छाया हुआ है, जिसकी वजह है इस लड़के का सेक्स डॉल से शादी करना. कहने को ये सब बड़ा हास्यपद सा लगता है पर इस शादी के पीछे लड़के की मंशा जान कर आप भी इस शादी की दाद देने लगेंगे.

28 वर्ष का ये युवक कैंसर के आखिरी स्टेज पर है और इसका बचना नामुमकिन सा है, जिससे ये युवक भी अच्छी तरह वाकिफ़ है. ये सब जानते हुए वो यह नहीं चाहता कि शादी के बाद किसी लड़की को विधवाओं की तरह अपनी सारी ज़िंदगी गुजारनी पड़े.

इसलिए इस युवक ने सेक्स डॉल से शादी करने का फैसला लिया. आज हम आपको इस युवक की शादी की कुछ खूबसूरत फ़ोटोज़ दिखा रहे हैं, जिसे देखने के बाद आप भी इस लड़के की तारीफों के पुल बांधने लगेंगे.

चिल्लर लेकर गाड़ी खरीदने पहुंचे भाई-बहन, डीलर भी उनके जीवन की कहानी सुनकर हो गया इमोशनल..

जयपुर। दिवाली वीक जस्ट अभी खत्म हुआ है। जहां कहीं सेल लगी हुई थी वह भी अब खत्म हो गई है। लेकिन इस दीवाली कुछ ऐसा हुआ जो आपको भी इमोशनल कर देगा। दरअसल दिवाली की रात जयपुर की एक स्कूटर कंपनी का शोरूम बंद होने ही वाला था कि 13 साल का एक बच्चा अपनी बहन के साथ दाखिल हुआ। दोनों के हाथों में बैग थे। 62 हजार रुपए के सिक्के लेकर यश बड़ी बहन रूपल के लिए स्कूटर खरीदने आया था। इतने सिक्के देखकर शोरूम कर्मचारी हैरान रह गए। एक बार तो स्कूटर देने से मना भी कर दिया। लेकिन जब यश ने पूरी कहानी सुनाई तो शोरूम मैनेजर को राजी होना पड़ा।

कहानी सुनकर इमोशनल हुआ डीलर

आठवीं में पढ़ने वाला यश और उसकी बहन रूपल दो सालों से पॉकेट मनी जमा कर रहे थे। यश के पिता की आटा चक्की है। दोनों को पॉकेट मनी सिक्कों में ही मिलती थी। जब नोट भी मिलते तो वे इस डर से सिक्कों में बदलवा लेते थे ताकी कहीं खर्च ना हो जाएं। जब 62 हजार रुपए जमा हो गए तो दोनों स्कूटर लेने पहुंच गए। माता-पिता को सरप्राइज देना चाहते थे, इसलिए उन्हें बताया नहीं। हालांकि मामा को जरूर साथ लाए थे। ताकी उनके साथ कोई बड़ा रहे और सही फैसले ले सके।

ढाई घंटे लगे पैसे गिनने में

होंडा एडवेंट के जनरल मैनेजर ने बताया कि उनकी पूरे करियर में यह ऐसा पहला केस था जब कोई पूरा पैसा सिक्कों के रूप में लेकर स्कूटर खरीदने आया हो। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कहा कि वह पेमेंट सिक्कों के द्वारा करेंगे तो पहले तो मैंने मना कर दिया था। लेकिन उन्होंने मुझे अपने स्कूटर लेने के पीछे की मेहनत और उसकी कहानी बताई तो मैं भी खुद को नहीं रोक पाया। इसलिए हमने एक्स्ट्रा टाइम लेकर यश और उसकी बहन के लिए शोरूम खोले रखा। पूरे स्टाफ ने बैठकर दो-ढाई घंटों में सिक्कों को गिना।

जानवर ने ऎसी देशभक्ति निभाई की दुनिया ने ठोका सलाम ..

यह किसी आम डॉगी कि फोटो नहीं बल्कि इसकी हकीकत जानकर आप भी हैरान रह जाएगें और सलाम ठोकने का मन करेगा। क्योंकि लाखों लोगों की
जिंदगी बचाने वाला “जंजीर ” नाम का यह लेब्राडोर डॉगी 17 नवंबर 2000 को जब शांत हुआ तो करोड़ों लोगों ने उसे सलाम ठोका कर श्रृद्धांजली दी थी। इतना ही नहीं बल्कि पुलिस ने भी पूरे राजकीय सम्मान के साथ इसका अंतिम संस्कार किया।

लाखों लोगों की जिंदगी बचाने वाला यह डॉगी जब शांत हुआ तो करोड़ों लोगों ने सलाम ठोक दी थी श्रृद्धांजलि…

कौन था जंजीर

आपको शायद ही पता हो लेकिन हम बता देते हैं कि जंजीर वो वफादार और जबरदस्त डॉगी था जो देश के लिए मर मिटने वाले किसी सपाही से कम नहीं था। यह महाराष्ट्र पुलिस के डॉग स्कवायड का एक होनहार कुत्ता था जिसने 1993 में मुम्बई में हुए सीरीयल बम धमाकों के दौरान अपनी जान पर खेलकर बमों को ढूंढ निकाला और लाखों लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

इतना विस्फोटक ढूंढ निकाला था

इसे जंजीर की काबिलियत ही कहेंगे कि मुम्बई धमाकों के समय इसने 3329 किलो आरडीएक्स विस्फोटक, 600 डेटोनेटर्स, 249 हेंडग्रेनेड और 6406 राउंड के सक्रिय गोला-बारूद ढूंढ निकाले थे। यह खतरनाक काम करके जंजीर लोगों के लिए हीरो बन गया था।

ये हैं भारत के दस बड़े बूचड़खानों के मालिकों के नाम, जो दुनियाभर में करते है बीफ निर्यात

उत्तर प्रदेश में बूचड़खाने बंद होने की वजह से स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। क्योंकि बूचड़खाने बंद होने की वजह से हजारों लोग बेरोजगार हो चुके है, वैसे भी मोदी सरकार के कार्यकाल में नोटबंदी की वजह से वैसे ही नौकरियां नहीं मिल रही है और बेरोजगारी बढ़ी हुई है। मोदी सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को बहुत ज्यादा बिगाड़ कर रख दिया है। अवैध बूचड़खाने पर कार्रवाई की जा रही है, अभी हाल ही में अलीगढ में पुलिस ने पांच वाहन पकड़े जिसमें 60 भैंसों को भरकर ले जाया जा रहा था।

बूचडखानों की वजह से उत्तर प्रदेश में हजारों लोगों की घरों की रोजी-रोटी का साधन होता है लेकिन अब बूचड़खाने बंद करने की वजह से लोगों में नाराजगी देखी जा सकती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि, भाजपा शुरू से ही बीफ पर राजनीति करती आई है, लेकिन एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि, राजनीतिक पार्टियों में सबसे ज्यादा बीफ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों से चन्दा भी भारतीय जनता पार्टी ही लेती है। इसके अलावा एक और हैरानी की बात यह है कि, हमारे देश के दस सबसे बड़े बूचड़खाने मुसलमान भाइयों के नहीं है बल्कि हिन्दू भाइयों के है जो विदेशों में बीफ एक्सपोर्ट करते है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी बीफ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी का नाम अल-कबीर है जो सऊदी अरब के अलावा दुनियाभर के कई देशों में बीफ एक्सपोर्ट करती है। अल-कबीर बूचड़खाने के मालिक का नाम सतीश सब्बरवाल हैं। इसके अलावा दूसरा सबसे बड़ा बूचड़खाने के मालिक का नाम सुनील कपूर हैं और इनकी बीफ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी का नाम अरेबियन एक्सपोर्ट्स है। एमकेआर एक्सपोर्ट्स के मालिक का नाम मदन एबट हैं, यह बूचडखाना दिल्ली में स्थित है।

इसके अलावा जो दुनियाभर के 35 देशों में बीफ निर्यात करती है उस कंपनी का नाम अल-नूर एक्सपोर्ट्स है और इसके मालिक का नाम सुनील सूद हैं। यह बूचडखाना उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के शेरनगर गाँव में स्थित है। देश में ज्यादातर बड़े बूचडखानों के मालिक हिन्दू भाई ही है, लेकिन फिर भी छोटे व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। बूचड़खाने बंद करने की वजह से हजारों लोगों की रोजी-रोटी का बंदोबस्त नहीं हो पा रहा है।

अगर अपने ये नही देखा तो क्या देखा?

ऐसे ही कुछ GIF हम आपको दिखाने जा रहे हैं जिन्हें देख कर आपका मन मचल जायेगा !अगर अपने ये नही देखा तो क्या देखा? यहgif देख के हसिके मरे लोटपोट हो जाओगे…

1. इस तरह का डान्स आपने खी देखा नही होगा…

2. और एक नमुना देखो…

3. Romantic है या नही आप हि बताइये…

ये हैं देश के कुछ ऐसे मंदिर, जहां ब्राह्मण नहीं, बल्कि समाज के वंचित तबके के लोग हैं पुजारी

हमारे समाज में जाति के आधार पर कर्म को बांट दिया गया है या फिर यूं कहें कि कर्म के आधार पर जाति को बांट दिया गया है. शायद यही वजह है कि सदियों से हमारे यहां पूजा-पाठ का काम ब्राह्मणों के हिस्से में आता है. लेकिन अब समाज और उसकी वर्ण व्यवस्था धीरे-धीरे बदल रही है.

कहते हैं भगवान पर किसी का अधिकार नहीं होता और न ही भगवान किसी खास जाति या व्यक्ति विशेष के होते हैं. हमारे समाज में अभी भी दलितों (निम्न जातियों) के पूजा-पाठ पर भी देश के कई हिस्सों में रोक की ख़बरे सुनने के मिलती हैं. इसी सोच को बदलने के लिए कबीर ने कहा था कि ‘जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान, मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान.’

Temple

लेकिन अब 21वीं सदी में इसमें बदलाव के बयार बह रही है. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि देवभूमि उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर है, जहां पुजारी कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति के लोग हैं. यह मंदिर चार धामों में से एक बद्रीनाथ- कर्णप्रयाग से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वैसे तो इस मंदिर को ‘कालेश्वर भैरव मंदिर’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों में यह मंदिर ‘काल्दू भैरव मंदिर’ के नाम से फे़मस है.

परंपराओं को तोड़ती और बदलाव की बानगी के तौर पर दिलचस्प ख़बर ये भी है कि बद्रीनाथ धाम में जो आरती गायी जाती है, उसे किसी हिंदू ने नहीं लिखा है. इस आरती को प्रयाग के बदरुद्दीन जी ने लिखा है, जो मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखते हैं. अगर आप वहां जाएंगे, तो आज भी वही आरती आपको सुनने को मिलेगी.

Temple

ऐसा ही एक अनोखा मंदिर झारखंड में भी है, जहां पुजारी कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय नहीं है, बल्कि दलित है. यह मंदिर खरसावां जिले के कुम्हारसाही में स्थित है. ऐसा नहीं है कि इस मंदिर को दलितों ने मिलकर बनाया है. बल्कि राजा-रजवाड़े के समय से ही यहां माता की पूजा-अर्चना की जा रही है. इस मंदिर में मां पाउड़ी देवी विराजमान हैं. लोगों के मुताबिक, मां पाउड़ी देवी की अत्यंत महत्ता है और उनकी महिमा अपरम्पार है.

Pujari

Image Source: indiasamvad
यही वजह है कि स्थानीय लोगों में विश्वास व आस्था का केंद्र बन चुकी पाउड़ी देवी की शक्ति पीठ में आम भक्त ही नहीं, बल्कि सत्ता की कुर्सी पर काबिज़ ‘सिरमौर’ भी शीश नवाने से नहीं चूकते हैं. यहां मां पाउड़ी को भगवती का रूप माना जाता है. खास बात ये है कि इस शक्ति पीठ में पुजारी के रूप में देउरी दलित समाज के लोग पूजा करते हैं.

बहरहाल, इन ख़बरों से ये तो ज़रूर पता चलता है कि अब समाज की बनी बनाई सारी धारणाएं टूट रही हैं, जो हमारे आने वाले समाज के भविष्य के लिए सच में वरदान है. आखिर लोकतांत्रिक और धार्मिक आज़ादी वाले देश में इंसान हर मामले में क्यों न स्वतंत्र हो?
News source: Jagran

कलावा बांधने के पीछे छुपा हुआ है गहरा वैज्ञानिक रहस्य, जो कम लोग ही जानते होंगे